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सीएम सिटी लाडवा में 'जुगाड़ वाहनों' का आतंक, बेकाबू बाइक-रेहड़ियों से थम रही सड़कों की रफ्तार

Jun 14, 2026 5:28 PM

लाडवा (विजय कौशिक)। मुख्यमंत्री का गृह क्षेत्र होने के नाते लाडवा की सड़कों को सूबे के लिए एक रोल मॉडल होना चाहिए था, लेकिन हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। शहर के बाजारों और मुख्य मार्गों पर इन दिनों 'मोटरसाइकिल रेहड़ियों' यानी जुगाड़ वाहनों का ऐसा तांडव चल रहा है कि आम आदमी सड़क पर चलने से कतराने लगा है। नियम-कानूनों को ताक पर रखकर दौड़ने वाले ये वाहन न केवल यातायात व्यवस्था को ठप कर रहे हैं, बल्कि आए दिन होने वाले हादसों की मुख्य वजह बन गए हैं।

कार को मारी टक्कर और दे दी दलील; पीड़ित दुकानदार कृष्ण लालर ने बयां किया दर्द

सड़क पर खुलेआम घूम रहे इस खतरे का अंदाजा स्थानीय व्यवसायी कृष्ण लालर के साथ हुई हालिया घटना से लगाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि बीते दिन जब वह अपनी दुकान बढ़ा कर कार से घर लौट रहे थे, तभी एक अनियंत्रित बाइक-रेहड़ी ने उनकी कार को पीछे से जोरदार टक्कर मार दी।

पीड़ित की जुबानी: "जब मैंने गाड़ी से उतरकर उस रेहड़ी वाले को रोका, तो उसने बेहद गैर-जिम्मेदाराना अंदाज में कहा कि रेहड़ी पर सामान ज्यादा लदा था, इसलिए ऐन वक्त पर ब्रेक नहीं लगे। जब मैंने कार के नुकसान की भरपाई की बात कही, तो वह भीड़ का फायदा उठाकर रफूचक्कर हो गया।"

कृष्ण ने बताया कि लाडवा के दुकानदारों के साथ ऐसा पहली बार नहीं हुआ है। इससे पहले भी ओवरस्पीड जुगाड़ वाहनों ने कई गाड़ियों को क्षतिग्रस्त किया है और विरोध करने पर इनके चालक मारपीट और गाली-गलौज पर उतारू हो जाते हैं।

हम टैक्स भरें और मलाई ये खाएं'— चार पहिया वाहन चालकों के सामने रोजी-रोटी का संकट

इस अवैध कारोबार का सबसे काला पहलू उन गरीब चार पहिया कमर्शियल वाहन चालकों से जुड़ा है, जो सरकार को भारी-भरकम रोड टैक्स और परमिट फीस चुकाते हैं। गाड़ी चालक श्रवण कुमार और उनके साथियों ने अपना दर्द साझा करते हुए कहा कि कुछ रसूखदार लोगों ने शहर में एक नहीं, बल्कि कई-कई जुगाड़ू रेहड़ियां बनवाकर किराए पर चलवा रखी हैं।

इन अवैध वाहनों का न तो कोई रजिस्ट्रेशन होता है और न ही बीमा। कम भाड़े के चक्कर में लोग अपना माल इन्हीं से भिजवाते हैं, जिसके चलते नियमों के तहत गाड़ी चलाने वाले चालकों का धंधा पूरी तरह चौपट हो चुका है। श्रवण कुमार कहते हैं, "हालत यह हो गई है कि घर का खर्च चलाना तो दूर, बैंक से लोन पर ली गई गाड़ियों की मासिक किस्तें चुकाना भी नामुमकिन हो गया है। हमारी गाड़ियां स्टैंड पर खड़ी-खड़ी धूल फांक रही हैं।"

मुख्यमंत्री नायब सैनी से हस्तक्षेप की मांग; क्या जागेगा प्रशासन?

सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि मोटरसाइकिल के इंजन की क्षमता एक सीमित वजन खींचने की होती है, लेकिन इन रेहड़ियों पर लोहे के सरिये, भारी कट्टे और कमर्शियल सामान लाद दिया जाता है। तेज रफ्तार में जब ये वाहन मुड़ते हैं, तो इनका पलटना तय होता है।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि बीच में पुलिस की सख्ती के कारण इनका प्रकोप थोड़ा कम हुआ था, लेकिन अब प्रशासनिक ढील का फायदा उठाकर ये फिर से हावी हो गए हैं। लाडवा की जनता और प्रभावित वाहन चालकों ने सीधे मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से अपील की है कि वे अपने गृह क्षेत्र की जनता को सुरक्षा का अहसास कराएं और इन जानलेवा जुगाड़ वाहनों को सड़कों से पूरी तरह जब्त करने का कड़ा आदेश जारी करें।

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