फतेहाबाद में आयुष्मान घोटाला: निजी अस्पताल पर CM फ्लाइंग की रेड, 1.57 करोड़ का फर्जीवाड़ा उजागर
Apr 18, 2026 12:41 PM
फतेहाबाद। केंद्र और राज्य सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी 'आयुष्मान भारत योजना' को फतेहाबाद के एक निजी अस्पताल ने कमाई का जरिया बना लिया। शुक्रवार को सीएम फ्लाइंग की टीम ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ मिलकर शहर के 'सद्भावना अस्पताल' पर अचानक छापा मारा। इस दौरान अस्पताल के भीतर जो नजारा मिला, उसने प्रशासनिक अधिकारियों के भी होश उड़ा दिए। जांच में सामने आया कि अस्पताल प्रशासन ने न केवल रिकॉर्ड के साथ छेड़छाड़ की, बल्कि उन गरीब मरीजों की जेब पर भी डाका डाला जिनके पास मुफ्त इलाज के लिए आयुष्मान कार्ड मौजूद था।
साढ़े तीन महीने में 1.57 करोड़ का क्लेम, पर रिकॉर्ड का अता-पता नहीं
सीएम फ्लाइंग की हिसार रेंज इंचार्ज सुनैना के नेतृत्व में हुई इस जांच में सबसे हैरान करने वाला तथ्य अस्पताल का वित्तीय डेटा रहा। रिकॉर्ड खंगालने पर पता चला कि 1 जनवरी 2026 से लेकर 17 अप्रैल 2026 तक अस्पताल ने करीब 1017 मरीजों का आयुष्मान योजना के तहत इलाज दिखाया। इसके एवज में सरकार से लगभग 1 करोड़ 57 लाख रुपये का क्लेम किया गया। गौर करने वाली बात यह है कि जब टीम ने इन मरीजों का मैन्युअल रिकॉर्ड और उपचार की फाइलें मांगी, तो अस्पताल प्रशासन बगले झांकने लगा। अस्पताल के पास मरीजों का कोई समुचित रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं था, जो सीधे तौर पर एक बड़े घोटाले की ओर इशारा करता है।
मुफ्त इलाज के नाम पर वसूली; पीड़ितों ने सुनाई आपबीती
छापेमारी के दौरान मौके पर मौजूद पीड़ित परिवारों ने अस्पताल की बेरहमी की दास्तां बयां की। स्वामी नगर के रहने वाले बबलू ने रोते हुए बताया कि उन्होंने अपने पिता को सांस की बीमारी के चलते भर्ती कराया था। आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद अस्पताल ने उनसे 21,480 रुपये नकद वसूले और दवाइयों के अलग से पैसे लिए। दुखद बात यह रही कि उनके पिता की उसी रात मृत्यु हो गई, लेकिन अस्पताल ने उनके कार्ड से भी 35,650 रुपये का क्लेम कर लिया। इसी तरह, अमनदीप नामक युवक ने बताया कि उनके पिता के सीने में दर्द होने पर भर्ती करने के दौरान उनसे भी 10,650 रुपये अवैध रूप से लिए गए।
बख्शे नहीं जाएंगे कोख के कातिल और सरकारी योजना के लुटेरे: सीएम फ्लाइंग
सीएम फ्लाइंग की इंचार्ज सुनैना ने कड़ा रुख अख्तियार करते हुए कहा कि आयुष्मान योजना के तहत किसी भी निजी अस्पताल द्वारा मरीज से एक रुपया भी नकद लेना कानूनन अपराध है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार की इस योजना का लाभ सीधे पात्र परिवारों तक पहुंचना चाहिए, न कि निजी अस्पतालों की तिजोरी में। जांच टीम में शामिल डॉक्टर सुशील और डॉक्टर जतिन ने सभी संदिग्ध दस्तावेजों को कब्जे में ले लिया है। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले इस अस्पताल के खिलाफ न केवल भारी जुर्माना लगाया जाएगा, बल्कि इसकी मान्यता रद्द करने और कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।