डंकी रूट से भारत आया और रची 300 स्कूलों को दहलाने की साजिश, गुरुग्राम पुलिस की बड़ी कार्रवाई
Mar 20, 2026 2:38 PM
गुरुग्राम। साइबर सिटी गुरुग्राम सहित देश के कई राज्यों के स्कूलों में बम होने की झूठी सूचना देकर दहशत फैलाने वाले मास्टरमाइंड को गुरुग्राम पुलिस ने धर दबोचा है। एसीपी प्रियांशु दीवान ने एक प्रेस वार्ता के दौरान खुलासा किया कि पकड़ा गया आरोपी सौरभ विश्वास उर्फ माइकल मूल रूप से बांग्लादेशी नागरिक है, जो 'डंकी रूट' (अवैध रास्ता) के जरिए भारतीय सीमा में दाखिल हुआ था। पुलिस ने इसे अहमदाबाद से गिरफ्तार किया है, जहां यह डिजिटल मार्केटिंग की आड़ में देश विरोधी गतिविधियों के लिए 'लॉजिस्टिक्स' तैयार कर रहा था।
$250 के लालच में बेची देश की सुरक्षा
पुलिस जांच में सामने आया कि 30 वर्षीय सौरभ डिजिटल मार्केटिंग का जानकार है। उसने साल 2024 में कोलकाता में बैठकर सैकड़ों ईमेल आईडी क्रिएट कीं। आरोपी एक फेसबुक ग्रुप के जरिए ढाका (बांग्लादेश) के रहने वाले मामुनूर राशिद के संपर्क में आया था। सौरभ ने करीब 300 जीमेल आईडी तैयार कर राशिद को महज 250 डॉलर (USDT क्रिप्टो करेंसी) के बदले बेच दीं। इन्हीं में से एक मेल आईडी का इस्तेमाल गुरुग्राम के 40 और देश भर के 300 से ज्यादा स्कूलों को धमकी भेजने के लिए किया गया।
खालिस्तान समर्थन और पीएम-सीएम को धमकी
यह मामला केवल स्कूलों तक सीमित नहीं था। धमकी भरी ईमेल्स में खालिस्तान का खुला समर्थन किया गया था। यही नहीं, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को एसवाईएल (SYL) मुद्दे को लेकर धमकाया गया और देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 'अगला टारगेट' बताया गया था। इन ईमेल के बाद जनवरी और मार्च महीने में गुरुग्राम के नामी स्कूलों में हड़कंप मच गया था, जिसके बाद बम निरोधक दस्ते और डॉग स्क्वायड को कई दिनों तक सर्च ऑपरेशन चलाना पड़ा था।
फर्जी पहचान और अंतरराष्ट्रीय पत्राचार
पकड़े गए आरोपी ने पश्चिम बंगाल में एक ब्रोकर के जरिए अपने फर्जी दस्तावेज तैयार करवाए थे। पुलिस को अंदेशा है कि 'सौरभ विश्वास' नाम भी फर्जी है। उसकी असली पहचान पुख्ता करने के लिए गुरुग्राम पुलिस ने पश्चिम बंगाल पुलिस और बांग्लादेश सरकार से पत्राचार शुरू कर दिया है। आरोपी के कब्जे से बरामद मोबाइल में मौजूद क्रिप्टो वॉलेट की भी जांच की जा रही है ताकि टेरर फंडिंग के एंगल को खंगाला जा सके।
रिमांड पर पूछताछ: और भी कई चेहरे बेनकाब होने की उम्मीद
एसीपी प्रियांशु दीवान ने बताया कि आरोपी फिलहाल पुलिस रिमांड पर है। उससे यह पता लगाया जा रहा है कि उसके व्हाट्सएप और टेलीग्राम ग्रुप में और कितने लोग जुड़े हुए हैं और अब तक कितने बांग्लादेशी नागरिक उसके जरिए अवैध रूप से भारत में दाखिल हुए हैं। पुलिस की साइबर टीमें उस 'मामूनूर राशिद' तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं, जो ढाका में बैठकर इस पूरे नेटवर्क को ऑपरेट कर रहा था।