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Gurugram Crime: गुरुग्राम में बिहार के युवक ने किया सुसाइड, 8 पन्नों के नोट में सुपरवाइजर पर लगाए खौफनाक आरोप

May 21, 2026 10:17 AM

गुरुग्राम। हरियाणा के मिलेनियम सिटी गुरुग्राम से एक ऐसी हृदयविदारक और विचलित कर देने वाली खबर सामने आई है, जिसने कॉर्पोरेट जगत के भीतर छिपे घिनौने चेहरे और प्रशासनिक संवेदनहीनता को उजागर कर दिया है। उद्योग विहार फेज-2 स्थित एक नामी प्राइवेट कंपनी 'TUV SUD साउथ एशिया प्राइवेट लिमिटेड' में काम करने वाले 30 वर्षीय रामपुकार यादव ने बीती 17 मई को अपने कमरे में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। मूल रूप से बिहार के बेगूसराय (गढ़पुरा थाना क्षेत्र के रक्सी गांव) का रहने वाला रामपुकार यहां रोजी-रोटी कमाने आया था, लेकिन उसे क्या मालूम था कि उसका सुपरवाइजर ही उसका काल बन जाएगा। मरने से ठीक पहले रामपुकार ने अपने भाई पंकज और भांजे पप्पू के व्हाट्सएप पर 8 पन्नों का एक सुसाइड नोट भेजा, जिसे पढ़कर किसी की भी रूह कांप जाए।

"लड़की अरेंज नहीं कर सकते तो अपनी पत्नी को बुलाओ"

रामपुकार ने अपने सुसाइड नोट में सुपरवाइजर देवेंद्र कुमार पर तीन साल से मानसिक, आर्थिक और शारीरिक शोषण करने के बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। पत्र में लिखा है कि एक दिन देवेंद्र ने उसे कोल्ड ड्रिंक में शराब मिलाकर पिलाई और बेसुध होने पर उसके साथ कुकर्म किया। इसके बाद वह लगातार ब्लैकमेल कर शारीरिक संबंध बनाने का दबाव डालता रहा। प्रताड़ना का सिलसिला यहीं नहीं रुका; आरोपी ने बाद में रामपुकार से लड़कियों की डिमांड शुरू कर दी। जब रामपुकार ने मना किया, तो देवेंद्र ने क्रूरता की सारी हदें पार करते हुए कहा कि 'अगर लड़की अरेंज नहीं कर सकते, तो अपनी पत्नी को गांव से बुलाओ।'

क्षेत्रीय अस्मिता को लेकर जलील करने का आरोप

सुसाइड नोट में आरोपी की संकीर्ण और जातिवादी मानसिकता का भी जिक्र है। रामपुकार ने लिखा है कि देवेंद्र उसे अक्सर 'बिहारी' कहकर कार्यस्थल पर अपमानित करता था। आरोपी तंज कसते हुए कहता था कि 'हरियाणा में एक भैंस 1 लाख 30 हजार रुपये की मिलती है, जबकि बिहारन 80 हजार में बिक जाती है।' इस मानसिक प्रताड़ना और ब्लैकमेलिंग से तंग आकर आखिरकार रामपुकार ने मौत को गले लगाना बेहतर समझा। घटना वाले दिन जब परिजनों ने व्हाट्सएप पर मैसेज देखा, तो उन्होंने तुरंत पड़ोसियों को फोन किया। दरवाजा तोड़ने पर रामपुकार का शव पंखे से लटकता मिला।

पुलिसिया सुस्ती से नाराज परिजन बिना पोस्टमॉर्टम शव लेकर बिहार लौटे

इस पूरे मामले में गुरुग्राम पुलिस की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। दिल्ली-एनसीआर में रहने वाले मृतक के रिश्तेदारों का आरोप है कि घटना की सूचना मिलने के बाद भी पुलिस ने 30 घंटे तक मुख्य आरोपी देवेंद्र के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज नहीं की। रविवार का हवाला देकर शव को दिल्ली के दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल के शवगृह में रखवा दिया गया, लेकिन सोमवार दोपहर तक कोई जांच अधिकारी वहां नहीं पहुंचा। पुलिस द्वारा मामले को टालने और 'पहले अंतिम संस्कार करो, फिर देखेंगे' वाले रवैये से तंग आकर बेबस परिजन बुधवार को बिना पोस्टमॉर्टम कराए ही रामपुकार की लाश को बेगूसराय अपने गांव ले गए। परिजनों का साफ कहना है कि जब तक आरोपी की गिरफ्तारी नहीं होती, उनका संघर्ष जारी रहेगा।

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