हरियाणा की तर्ज पर अब पूरे देश में अग्निवीरों को मिलेगा आरक्षण, गृह मंत्रालय ने भेजी सिफारिश
Mar 27, 2026 10:52 AM
हरियाणा। भारतीय सेना की 'अग्निपथ' योजना को लेकर जारी बहस के बीच केंद्र सरकार ने अग्निवीरों के पुनर्वास के लिए अब तक का सबसे बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने देश के सभी मुख्यमंत्रियों को एक औपचारिक पत्र लिखकर आग्रह किया है कि वे अपने राज्यों की सरकारी नौकरियों में अग्निवीरों के लिए 20 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान करें। केंद्र का तर्क है कि अनुशासित और प्रशिक्षित इन युवाओं की ऊर्जा का लाभ राज्य के सुरक्षा और प्रशासनिक ढांचे को मिलना चाहिए।
2027 की तैयारी: पहले बैच के बाहर आने से पहले सुरक्षा कवच
दरअसल, साल 2022 में शुरू हुई इस योजना के तहत भर्ती हुए जवानों का पहला बैच साल 2027 में अपनी 4 साल की सेवा पूरी कर सेना से बाहर आएगा। गृह मंत्रालय चाहता है कि जब ये युवा नागरिक जीवन में लौटें, तो उनके पास रोजगार का एक सुनिश्चित विकल्प मौजूद हो। पत्र में विशेष रूप से उन विभागों का जिक्र किया गया है जहाँ शारीरिक दक्षता और अनुशासन प्राथमिक शर्त है, जैसे—पुलिस कॉन्स्टेबल, फायरमैन, जेल वार्डन और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF)।
हरियाणा ने दिखाई राह, अन्य राज्यों के लिए बनेगा मिसाल
अग्निवीरों के समायोजन के मामले में हरियाणा ने 'अग्रणी राज्य' की भूमिका निभाई है। मुख्यमंत्री कार्यालय के सूत्रों के मुताबिक, हरियाणा पहले ही पुलिस और खनन गार्ड जैसे पदों पर अग्निवीरों को प्राथमिकता देने का कानून बना चुका है। इतना ही नहीं, जो अग्निवीर सरकारी नौकरी के बजाय अपना स्टार्टअप या व्यापार शुरू करना चाहते हैं, हरियाणा सरकार उन्हें ऋण पर विशेष सब्सिडी भी दे रही है। निजी क्षेत्र को प्रोत्साहित करने के लिए उन औद्योगिक इकाइयों को भी अनुदान देने का फैसला लिया गया है जो अपनी यूनिट में अग्निवीरों को रोजगार देंगी।
विपक्ष के सवालों का 'पॉलिसी' से जवाब
अग्निपथ योजना की लॉन्चिंग के समय से ही विपक्ष 4 साल बाद जवानों के भविष्य को लेकर सवाल उठाता रहा है। जानकारों का मानना है कि राज्यों को 20 फीसदी आरक्षण की यह सिफारिश उसी राजनीतिक और सामाजिक चिंता का समाधान है। यदि राज्य सरकारें इस प्रस्ताव को हरी झंडी देती हैं, तो पुलिस और सुरक्षा बलों को तैयार-बर-तैयार प्रशिक्षित वर्कफोर्स मिलेगी, जिससे राज्यों का ट्रेनिंग बजट भी बचेगा और युवाओं को 'पूर्व सैनिक' जैसा सम्मानजनक स्थान भी मिल सकेगा।