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हुड्डा की कोठी का विवाद: कैबिनेट में फंसा पीनल रेंट माफी का पेंच, मंत्रियों ने मांगी पूरी रिपोर्ट

Apr 16, 2026 1:36 PM

हरियाणा। हरियाणा की राजनीति के दिग्गज नेता और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के सरकारी आवास का विवाद सुलझने के बजाय और उलझता नजर आ रहा है। सेक्टर-7 स्थित कोठी नंबर-70 के 'पीनल रेंट' को माफ करने के जिस प्रस्ताव को मुख्यमंत्री नायब सैनी ने कैबिनेट में रखा था, उसे अपनों के ही विरोध का सामना करना पड़ा है। तीन कैबिनेट मंत्रियों ने इस पर तीखी आपत्ति जताते हुए स्पष्ट कर दिया कि जनता के पैसे की इस तरह माफी बिना ठोस वित्तीय ब्यौरे के नहीं होनी चाहिए।

15 दिन की मोहलत और 16 लाख का जुर्माना

पूरा विवाद 2024 के विधानसभा चुनावों के बाद शुरू हुआ। नियमानुसार, नई सरकार के गठन के 15 दिनों के भीतर सरकारी आवास खाली करना अनिवार्य होता है। सरकार ने हुड्डा को दिसंबर 2024 में ही कोठी खाली करने का नोटिस दिया था, लेकिन कांग्रेस की ओर से नेता प्रतिपक्ष के चयन में हुई देरी और हुड्डा द्वारा समय मांगे जाने के बावजूद आवास खाली नहीं हुआ। नतीजा यह हुआ कि लोक निर्माण विभाग (PWD) के नियमों के तहत मीटर घूमता रहा और जुर्माना बढ़कर 16.49 लाख रुपये तक पहुंच गया।

मंत्रियों का कड़ा रुख: "पूरी रिपोर्ट के बिना राहत नहीं"

कैबिनेट बैठक के सूत्रों के मुताबिक, जैसे ही यह मुद्दा मेज पर आया, कुछ मंत्रियों ने मोर्चा खोल दिया। उनका तर्क था कि कोठी में पिछले कई महीनों से न केवल रिहाइश थी, बल्कि वहां से पार्टी की गतिविधियां भी चल रही थीं। मंत्रियों ने सुझाव दिया कि सिर्फ रेंट माफ करना गलत परंपरा होगी। उन्होंने मांग की कि इस अवधि के दौरान कोठी के रख-रखाव (Maintenance), बिजली-पानी के बिल और वहां तैनात मैनपावर पर सरकारी खजाने से कितना पैसा खर्च हुआ, उसका पूरा ब्यौरा सदन के सामने रखा जाए। मंत्रियों की दलील थी कि जब तक वास्तविक खर्च की पूरी तस्वीर सामने नहीं आती, तब तक राहत देने का फैसला जल्दबाजी होगी।

PWD का सख्त नियम: 400 गुना तक वसूली का डर

हरियाणा लोक निर्माण विभाग के नियम इस मामले में बेहद सख्त हैं। यदि कोई विधायक या मंत्री तय समय सीमा में बंगला खाली नहीं करता, तो पहले महीने 50 गुना, दूसरे महीने 100 गुना और चौथे महीने से 400 गुना तक पीनल रेंट वसूलने का प्रावधान है। हुड्डा के मामले में यह राशि लाखों में पहुंच चुकी है। हालांकि, पूर्व की सरकारों में अक्सर आपसी सहमति या कैबिनेट के जरिए ऐसे रेंट माफ कर दिए जाते थे, लेकिन इस बार सरकार के भीतर उठते विरोध के स्वर बता रहे हैं कि हुड्डा की राह आसान नहीं होगी।

अब क्या होगा आगे?

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने फिलहाल इस संवेदनशील मुद्दे को टालते हुए संबंधित विभाग को विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए हैं। अब सबकी नजरें अगली कैबिनेट बैठक पर टिकी हैं। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि यह केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि इसके जरिए सत्ता पक्ष विपक्ष के सबसे बड़े चेहरे पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की रणनीति भी अपना रहा है। अगली बैठक में जब विभाग पूरी रिपोर्ट पेश करेगा, तभी साफ होगा कि हुड्डा को 'सरकारी राहत' मिलेगी या फिर उन्हें जेब ढीली करनी पड़ेगी।

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