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चरखी दादरी चुनाव विवाद खत्म: कांग्रेस प्रत्याशी ने हाई कोर्ट से वापस ली याचिका, ईवीएम का डाटा हुआ डिलीट

Mar 26, 2026 12:37 PM

चरखी दादरी हरियाणा की राजनीति में हफ्तों तक चर्चा का केंद्र रही चरखी दादरी की 'वोट चोरी' वाली कहानी का पटाक्षेप हो गया है। चुनाव परिणामों के बाद कांग्रेस द्वारा लगाए गए धांधली के आरोपों के बीच, कांग्रेस प्रत्याशी डॉ. मनीषा सांगवान ने पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट में दायर अपनी चुनौती याचिका को वापस ले लिया है। इस कानूनी कदम के बाद, बुधवार को चरखी दादरी के उपायुक्त डॉ. मुनीश नागपाल की देखरेख में चुनावी वेयरहाउस खोला गया और नियमानुसार ईवीएम में दर्ज डाटा को पूरी तरह डिलीट (Clear) कर दिया गया। इस दौरान विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि भी गवाह के तौर पर मौजूद रहे।

राहुल गांधी के दावों पर भाजपा का तीखा हमला

बता दें कि कांग्रेस के शीर्ष नेता राहुल गांधी ने बाकायदा प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चरखी दादरी का उदाहरण देते हुए चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे। अब बाजी पलटते ही दादरी से भाजपा विधायक सुनील सांगवान ने मोर्चा संभाल लिया है। उन्होंने कहा कि बिना किसी ठोस तथ्य के संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाना कांग्रेस की पुरानी आदत है। विधायक ने तंज कसते हुए कहा कि हाई कोर्ट से याचिका वापस लेना इस बात की पुष्टि करता है कि कांग्रेस के पास कोई सबूत नहीं थे और वे केवल हार की खीझ मिटाने के लिए जनता में भ्रम फैला रहे थे।

ऑडियो क्लिप और 'वोट के बदले पैसे' का नया मोर्चा

सियासी आरोप-प्रत्यारोप यहीं नहीं रुके। विधायक सुनील सांगवान ने कांग्रेस प्रत्याशी डॉ. मनीषा सांगवान पर एक नया और गंभीर हमला बोला है। उन्होंने एक कथित वायरल ऑडियो का जिक्र करते हुए दावा किया कि कांग्रेस प्रत्याशी ने एक व्यक्ति से वोट के नाम पर दिए गए 10 लाख रुपये वापस मांगे थे। विधायक ने सुनील जांगड़ा नामक व्यक्ति पर हुए हमले को भी इसी विवाद से जोड़ते हुए कहा कि इन्हीं आंतरिक कलह और विवादों के चलते कांग्रेस को अदालत से कदम पीछे खींचने पड़े।

प्रशासनिक पारदर्शिता का हवाला

प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, चुनाव आयोग के नियमों के मुताबिक, यदि किसी सीट पर चुनाव याचिका (EP) लंबित नहीं है, तो एक निश्चित समय सीमा के बाद ईवीएम का डाटा क्लियर कर उन्हें भविष्य के उपयोग के लिए तैयार किया जाता है। वेयरहाउस में इस प्रक्रिया के दौरान पूरी पारदर्शिता बरती गई और वीडियोग्राफी भी कराई गई। अब चूंकि कानूनी चुनौती खत्म हो गई है, इसलिए भाजपा इस मुद्दे को अपनी नैतिक और लोकतांत्रिक जीत के रूप में पेश कर रही है, जबकि कांग्रेस इस पूरे मामले पर फिलहाल रक्षात्मक नजर आ रही है।

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