हरियाणा के किसानों की बल्ले-बल्ले: अब 'एग्री डिस्कॉम' देगा सस्ती बिजली, सरकार ने जारी की अधिसूचना
Apr 07, 2026 12:44 PM
हरियाणा। हरियाणा सरकार ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए एक ऐतिहासिक प्रशासनिक बदलाव किया है। अब राज्य के किसानों को बिजली के लिए उत्तर या दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम के भरोसे नहीं रहना होगा। सरकार ने विशेष रूप से कृषि क्षेत्र के लिए 'हरियाणा एग्री डिस्कॉम' (Agri Discom) नाम से तीसरी वितरण कंपनी बनाने की अधिसूचना जारी कर दी है। इस फैसले का सबसे बड़ा असर बिजली की उपलब्धता और तकनीकी खामियों को दूर करने की रफ्तार पर पड़ेगा। मुख्यमंत्री का मानना है कि कृषि क्षेत्र राज्य की रीढ़ है, इसलिए इसे सामान्य उपभोक्ताओं से अलग कर विशेष श्रेणी में सेवा देना जरूरी है।
7.17 लाख उपभोक्ताओं का होगा ट्रांसफर
जनवरी 2026 तक के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम (UHBVN) के 3.54 लाख और दक्षिण हरियाणा (DHBVN) के 3.62 लाख कृषि उपभोक्ताओं को अब नए 'एग्री डिस्कॉम' में स्थानांतरित कर दिया जाएगा। इसका मतलब यह है कि अब ट्यूबवेल कनेक्शन लेने से लेकर खराब ट्रांसफार्मर बदलवाने तक के सारे काम इसी नई कंपनी के जरिए होंगे। 11 केवी के फीडर, लाइनें और मीटरिंग की जिम्मेदारी भी अब इसी समर्पित टीम के पास होगी।
सब्सिडी का बोझ कम करने पर जोर
फिलहाल हरियाणा सरकार किसानों को महज 10 पैसे प्रति यूनिट की दर से बिजली मुहैया करा रही है, जिसके लिए खजाने से हर साल करीब 7,000 करोड़ रुपये की सब्सिडी दी जाती है। नई कंपनी का एक प्रमुख उद्देश्य इस भारी-भरकम सब्सिडी के बोझ को कम करना भी है। इसके लिए 'पीएम कुसुम' जैसी सौर ऊर्जा योजनाओं को इसी कंपनी के अधीन लाया जाएगा। लक्ष्य यह है कि दिन के समय सौर ऊर्जा के जरिए किसानों को सस्ती बिजली दी जाए, जिससे थर्मल पावर पर निर्भरता और सरकारी खर्च दोनों में कमी आए।
15 अगस्त से शुरू होगा नया अध्याय
सरकार ने इस नई व्यवस्था को लागू करने के लिए 15 अगस्त 2026 की समयसीमा तय की है। इसके संचालन के लिए करीब 3,100 से 3,600 कर्मचारियों की फौज तैनात की जाएगी, जिन्हें मौजूदा बिजली कंपनियों से ही प्रतिनियुक्ति (Transfer) पर लाया जाएगा। इसके साथ ही, कृषि क्षेत्र से जुड़ी 166.82 करोड़ की बकाया राशि और करीब 5,427 करोड़ की देनदारियां भी नई कंपनी के खाते में ट्रांसफर होंगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बंटवारे से काम में विशेषज्ञता आएगी और किसानों की शिकायतों का निपटारा अब जिला स्तर पर कहीं अधिक तेजी से हो सकेगा।