हरियाणा बैंक घोटाला: CBI ने मांगी 5 IAS अफसरों से पूछताछ की इजाजत, ब्यूरोक्रेसी में मचा हड़कंप
May 10, 2026 10:16 AM
हरियाणा। हरियाणा की नौकरशाही में इस समय सन्नाटा और सुगबुगाहट दोनों साथ-साथ चल रहे हैं। राज्य के बहुचर्चित ₹590 करोड़ के बैंक घोटाले की जांच कर रही केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने अब उन 'बड़े चेहरों' को बेनकाब करने की तैयारी कर ली है, जिनके संरक्षण में कथित तौर पर यह पूरा खेल रचा गया। सीबीआई ने प्रदेश सरकार से 5 आईएएस अफसरों से आमने-सामने पूछताछ करने के लिए धारा 17-A के तहत इजाजत मांगी है। सचिवालय के गलियारों में चर्चा है कि अनुमति से जुड़ी फाइल मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी के पास पहुंच चुकी है और अगले 48 से 72 घंटों के भीतर इस पर बड़ी मुहर लग सकती है।
आखिर अधिकारियों तक कैसे पहुंची जांच की आंच?
अब तक इस मामले में छोटी मछलियों और बैंक कर्मचारियों पर कार्रवाई हो रही थी, लेकिन सीबीआई के हाथ लगे कुछ अहम सबूतों ने कहानी बदल दी है। सूत्रों के मुताबिक, जांच एजेंसी को कुछ ऐसी वॉइस रिकॉर्डिंग्स और डिजिटल साक्ष्य मिले हैं, जो सीधे तौर पर इन बड़े अधिकारियों और घोटाले के मास्टरमाइंड्स के बीच के कनेक्शन की ओर इशारा करते हैं। इसके अलावा, फाइलों के उस 'मूवमेंट' ने भी एजेंसी का शक पुख्ता किया है, जहां वित्तीय नियमों और आपत्तियों को दरकिनार कर फंड ट्रांसफर के आदेश दिए गए। सीबीआई अब इन अधिकारियों से मिलकर इन रिकॉर्डिंग्स को क्रॉस-वेरिफाई करना चाहती है।
सरकार के लिए 'इधर कुआं, उधर खाई' वाली स्थिति
नायब सैनी सरकार के लिए यह फैसला लेना किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है। एक तरफ जहां सरकार ने ही इस मामले की सीबीआई जांच की सिफारिश कर अपनी 'जीरो टॉलरेंस' नीति का संदेश दिया था, वहीं दूसरी तरफ अपने ही शीर्ष अफसरों के खिलाफ जांच की अनुमति देना प्रशासनिक मनोबल के लिहाज से चुनौतीपूर्ण है। जानकारों का मानना है कि चूंकि सरकार खुद भ्रष्टाचार के मुद्दे पर आक्रामक रही है, इसलिए अनुमति रोकने की गुंजाइश कम ही है। अगर देरी हुई, तो विपक्षी दल इसे जांच को प्रभावित करने की कोशिश बताकर मुद्दा बना सकते हैं।
क्या था ₹590 करोड़ का यह पूरा गणित?
यह पूरा मामला हरियाणा पावर जनरेशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPGCL) के सरकारी खजाने में सेंधमारी से जुड़ा है। आरोप है कि सरकारी पैसे को नियम-कायदों की धज्जियां उड़ाकर आईडीएफसी और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक में जमा कराया गया। वहां से यह पैसा 'स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट' और 'कैप को फिनटेक सर्विसेज' जैसी फर्जी कंपनियों के खातों में भेज दिया गया। 8 अप्रैल को सीबीआई द्वारा दर्ज एफआईआर में साफ कहा गया है कि यह कोई साधारण गलती नहीं, बल्कि सरकारी धन को ठिकाने लगाने की एक सोची-समझी साजिश थी।
रसूखदार चेहरों पर पहले ही गिर चुकी है गाज
सरकार ने जांच की गंभीरता को देखते हुए साकेत कुमार और पंकज अग्रवाल जैसे बड़े अफसरों को उनके अहम पदों से पहले ही हटाकर कम महत्वपूर्ण विभागों में भेज दिया है। साकेत कुमार से मुख्यमंत्री के अतिरिक्त प्रधान सचिव और एचपीजीसीएल के एमडी जैसे रसूखदार पद वापस लिए गए, वहीं पंकज अग्रवाल को भी सिंचाई विभाग से हटाकर आर्किटेक्चर विभाग की जिम्मेदारी दी गई। अब सीबीआई की औपचारिक पूछताछ के बाद यह तय होगा कि इन अधिकारियों की भूमिका महज लापरवाही थी या वे इस करोड़ों के घोटाले के हिस्सेदार थे।