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हरियाणा चिराग योजना में बड़ा बदलाव: अब 8 लाख नहीं, सिर्फ इतनी आय वाले बच्चों को मिलेगा प्राइवेट स्कूल में दाखिला

Apr 03, 2026 11:43 AM

हरियाणा। हरियाणा के शिक्षा जगत में उस समय खलबली मच गई जब सरकार ने 'मुख्यमंत्री हरियाणा समान शिक्षा राहत, सहायता एवं अनुदान' (चिराग) योजना के नियमों को रातों-रात बदल दिया। अब तक 8 लाख रुपये तक की सालाना आय वाले परिवारों के बच्चे इस योजना के तहत निजी स्कूलों में दाखिला ले पा रहे थे, लेकिन नए आदेशों ने इस सीमा को सीधे 1.80 लाख रुपये पर ला दिया है। सरकार के इस 'यू-टर्न' से उन अभिभावकों की उम्मीदों पर पानी फिर गया है जो अपने बच्चों को बेहतर निजी संस्थानों में पढ़ाने का सपना देख रहे थे। शिक्षा विभाग ने साफ कर दिया है कि अब यह योजना सिर्फ 'अंत्योदय' परिवारों तक ही सीमित रहेगी।

फैमिली आईडी बनेगी आधार, वेरिफिकेशन में नहीं चलेगी ढिलाई

नए नियमों के मुताबिक, अब दाखिले की पूरी प्रक्रिया परिवार पहचान पत्र (पीपीपी) के इर्द-गिर्द घूमेगी। शिक्षा विभाग ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए हैं कि पीपीपी आईडी में सत्यापित आय के बिना किसी भी छात्र का आवेदन स्वीकार न किया जाए। यदि किसी परिवार की आय आईडी में 1.80 लाख से एक रुपया भी ऊपर पाई गई, तो उन्हें योजना का लाभ नहीं मिलेगा। सरकार का तर्क है कि इस कदम से संसाधन उन बच्चों तक पहुंचेंगे जो आर्थिक रूप से बेहद कमजोर हैं, लेकिन धरातल पर इसका विरोध शुरू हो गया है क्योंकि बड़ी संख्या में परिवार इस दायरे से बाहर हो गए हैं।

सत्र 2026-27 से लागू होंगे नए नियम, पुराने आवेदनों पर संशय

विभाग द्वारा जारी ताजा नोटिफिकेशन में स्पष्ट किया गया है कि आगामी शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए एडमिशन प्रक्रिया इन नए मापदंडों के तहत ही पूरी की जाएगी। इसका सीधा असर उन परिवारों पर पड़ेगा जिन्होंने पुरानी 8 लाख की आय सीमा के भरोसे अपनी प्लानिंग की थी। निजी स्कूल संचालक भी इस फैसले से खासे परेशान हैं, क्योंकि उनके पास आने वाले आवेदनों की संख्या में अब भारी गिरावट आने की संभावना है। आदेश में साफ तौर पर पुराने नियमों को वापस लेने की बात कही गई है, जिससे अब पुराने आवेदकों के लिए भी पात्रता का संकट खड़ा हो गया है।

बजट का प्रबंधन या पात्रता की शुचिता?

राजनीतिक गलियारों और अभिभावक संघों में इस बात की चर्चा तेज है कि क्या सरकार ने बजट के दबाव में यह सीमा घटाई है या फिर वे केवल 'अति-गरीब' वर्ग को ही टारगेट करना चाहते हैं। 8 लाख से सीधा 1.80 लाख पर आना एक बहुत बड़ा अंतर है, जो प्रदेश के मध्यम वर्गीय परिवारों को सीधे तौर पर प्रभावित कर रहा है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सरकार को घेरे जाने की पूरी संभावना है, क्योंकि पीपीपी आईडी में आय के सत्यापन को लेकर पहले ही प्रदेश भर में काफी विवाद चल रहा है।

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