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हरियाणा स्वास्थ्य अपडेट: पीपीपी मोड पर एमआरआई और ऑटोमेटेड सफाई, अस्पतालों को मिला हाईटेक कवच

Mar 22, 2026 5:19 PM

हरियाणा।  हरियाणा में स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने के लिए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व वाली सरकार अब 'एक्शन मोड' में नजर आ रही है। स्वास्थ्य मंत्री आरती राव ने चंडीगढ़ में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक के दौरान स्पष्ट किया कि सरकार का लक्ष्य प्रदेश के हर नागरिक को उसके घर के नजदीक ही बेहतरीन स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना है। इसी रणनीति के तहत, राज्य के छह प्रमुख जिलों—नूंह, रेवाड़ी, चरखी दादरी, रोहतक, जींद और हिसार—के नागरिक अस्पतालों में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के आधार पर एमआरआई स्कैन की मशीनें लगाने का फैसला लिया गया है।

नूंह और रेवाड़ी को 'सिटी स्कैन' की सौगात: महंगे इलाज से मिलेगी मुक्ति

अक्सर देखा जाता है कि सड़क हादसों या गंभीर बीमारियों के दौरान मरीजों को सिटी स्कैन के लिए निजी डायग्नोस्टिक सेंटरों पर निर्भर रहना पड़ता था, जहां उनसे मोटी रकम वसूली जाती थी। स्वास्थ्य मंत्री ने इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए मांडीखेड़ा (नूंह) और रेवाड़ी के नागरिक अस्पतालों में सिटी स्कैन सेवाओं को तुरंत प्रभाव से शुरू करने की स्वीकृति दी है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि इन सेवाओं को लागू करने में पूरी पारदर्शिता बरती जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि आम जनता को इसका लाभ समयबद्ध तरीके से मिले।

अस्पतालों में दिखेगी 'कॉर्पोरेट' जैसी सफाई, ऑटोमेटेड सिस्टम होगा लागू

स्वास्थ्य सुविधाओं के साथ-साथ अस्पतालों के वातावरण को संक्रमण मुक्त बनाने के लिए भी सरकार ने बजट का पिटारा खोला है। कुरुक्षेत्र, जींद और गुरुग्राम के जिला अस्पतालों में अब पुराने ढर्रे के बजाय 'मैकेनाइज्ड और ऑटोमेटेड' क्लीनिंग सिस्टम लागू किया जाएगा। इसका मतलब है कि अब इन बड़े अस्पतालों के गलियारों और वार्डों में मशीनों के जरिए सफाई होगी, जिससे अस्पताल परिसर अधिक स्वच्छ और रोगाणु मुक्त रह सकेंगे।

"किफायती और गुणवत्तापूर्ण इलाज हमारी प्राथमिकता": आरती राव

बैठक के बाद स्वास्थ्य मंत्री आरती राव ने कहा, "हमारी सरकार प्रदेश के सार्वजनिक स्वास्थ्य तंत्र के आधुनिकीकरण के लिए प्रतिबद्ध है। सरकारी अस्पतालों में सुविधाओं की कमी को दूर करना और नई तकनीक को अपनाना हमारी प्राथमिकता है। पीपीपी मोड पर शुरू होने वाली इन सेवाओं से न केवल सरकार पर वित्तीय बोझ कम होगा, बल्कि विशेषज्ञों के जरिए मरीजों को सटीक जांच रिपोर्ट मिल सकेगी।" उन्होंने संबंधित विभाग के अधिकारियों को सख्त हिदायत दी है कि इन परियोजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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