हरियाणा में गेहूं खरीद का महा-रिकॉर्ड; अब व्हाट्सएप पर मिलेगा जे-फॉर्म
Apr 25, 2026 3:25 PM
हरियाणा। चंडीगढ़ में पत्रकारों से मुखातिब होते हुए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने विपक्ष को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि बायोमेट्रिक सत्यापन जैसी आधुनिक प्रणालियों को लेकर विपक्षी दल किसानों के बीच बेवजह का डर पैदा कर रहे हैं। सीएम ने दो टूक कहा कि ये तकनीकें किसानों की परेशानी बढ़ाने के लिए नहीं, बल्कि बिचौलियों के खेल को खत्म करने और पारदर्शिता लाने के लिए हैं। उन्होंने दांवे के साथ कहा कि आज का किसान जागरूक है और वह भाजपा सरकार की पारदर्शी नीतियों पर पूरा भरोसा जता रहा है।
मंडियों में गेहूं का अंबार: 4 साल की सबसे बड़ी आवक
मुख्यमंत्री ने आंकड़ों की बाजीगरी के बजाय धरातल की हकीकत सामने रखी। उन्होंने बताया कि रबी विपणन सत्र 2026-27 में अब तक कुल ₹21,044 करोड़ मूल्य की फसल मंडियों में आ चुकी है। मंडियों में अब तक 81 लाख मीट्रिक टन से अधिक गेहूं की आवक दर्ज की गई है, जिसमें से 70 लाख टन से अधिक की खरीद सरकारी एजेंसियां कर चुकी हैं। सीएम ने यह भी साझा किया कि 11 अप्रैल को महज एक दिन के भीतर 7 लाख टन गेहूं मंडियों में पहुँचा, जो अपने आप में एक मिसाल है। अब तक करीब 5.80 लाख किसान अपनी उपज लेकर सरकारी कांटों तक पहुँच चुके हैं।
व्हाट्सएप पर 'जे-फॉर्म' और 'ई-खरीद' ऐप की सौगात
किसानों के जीवन को और सुगम बनाने के लिए मुख्यमंत्री ने तकनीक के विस्तार का रोडमैप भी पेश किया। उन्होंने बताया कि अगले सप्ताह से किसानों को व्हाट्सएप के जरिए क्यूआर कोड आधारित 'जे-फॉर्म' (J-Form) भेजे जाएंगे। इससे किसानों को बैंक से लोन लेने या अन्य कागजी औपचारिकताओं में किसी भी तरह की परेशानी नहीं होगी। इतना ही नहीं, अगले सीजन से सरकार 'ई-खरीद' (e-Kharid) ऐप लॉन्च करने जा रही है। इस ऐप के जरिए किसान अपनी फसल की बुआई से लेकर, भूमि सत्यापन, गेट पास और भुगतान की ताजा स्थिति (Payment Status) एक ही क्लिक पर देख सकेंगे।
उठान की प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश
खरीद के साथ-साथ मंडियों में अनाज के उठान (Lifting) को लेकर भी सीएम ने अपडेट दिया। उन्होंने बताया कि अब तक 34.56 लाख मीट्रिक टन गेहूं का उठान गोदामों तक किया जा चुका है। सीएम ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि मंडियों में गेहूं के कट्टों का अंबार न लगने दिया जाए और उठान की प्रक्रिया को और तेज किया जाए ताकि आने वाले किसानों को जगह की कमी महसूस न हो।