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हरियाणा सोलर स्कैम: 83 करोड़ के घोटाले में IFS अधिकारी पर लटकी तलवार, रसूखदारों में मचा हड़कंप

Apr 02, 2026 2:57 PM

हरियाणा। हरियाणा को सौर ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने का जिम्मा संभालने वाली एजेंसी 'क्रेस्ट' (चंडीगढ़ रिन्यूएबल एनर्जी एंड साइंस एंड टेक्नोलॉजी प्रमोशन सोसाइटी) खुद एक गहरे वित्तीय भंवर में फंस गई है। विभाग के भीतर ₹83 करोड़ के जिस घोटाले की बू आ रही है, उसने सरकार के 'ग्रीन विजन' पर कालिख पोत दी है। शुरुआती तफ्तीश में जो तथ्य सामने आए हैं, वे चौंकाने वाले हैं—नियमों को ताक पर रखकर करोड़ों रुपये का ऐसा भुगतान किया गया, जिसका धरातल पर कोई वजूद ही नहीं था। सोलर पैनल लगाने और अक्षय ऊर्जा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के नाम पर जारी किया गया बजट रसूखदारों की जेबों में चला गया।

आईएफएस अधिकारी पर शिकंजा: क्या रसूख बचा पाएगा साख?

इस पूरे खेल के केंद्र में भारतीय वन सेवा (IFS) के एक वरिष्ठ अधिकारी का नाम प्रमुखता से उभर रहा है। विभागीय सूत्रों की मानें तो इन अधिकारी के कार्यकाल के दौरान सौर परियोजनाओं के क्रियान्वयन में भारी अनियमितताएं बरती गईं। आरोप है कि वेंडर्स और बाहरी एजेंसियों के साथ मिलकर एक ऐसा सिंडिकेट चलाया गया, जिसने कागजों पर तो योजनाएं पूरी दिखा दीं, लेकिन वास्तविकता में सरकारी तिजोरी खाली कर दी गई। वर्तमान में इस अधिकारी की भूमिका की गहन समीक्षा की जा रही है और संकेत मिल रहे हैं कि उनके खिलाफ न केवल विभागीय कार्रवाई होगी, बल्कि गिरफ्तारी की नौबत भी आ सकती है।

फर्जी बिल और 'कागजी' प्रोजेक्ट्स का मायाजाल

जांच में यह भी सामने आया है कि इस घोटाले को अंजाम देने के लिए 'फर्जी बिलिंग' का सहारा लिया गया। कई ऐसी परियोजनाओं के लिए भुगतान कर दिया गया जो कभी शुरू ही नहीं हुईं। विशेषज्ञों का कहना है कि इतने बड़े स्तर का गबन बिना निचले स्तर के कर्मचारियों और बाहरी ठेकेदारों की मिलीभगत के मुमकिन नहीं है। यह केवल एक व्यक्ति का काम नहीं, बल्कि एक सुसंगठित भ्रष्टाचार का ढांचा नजर आ रहा है जिसने पर्यावरण संरक्षण के नाम पर आए फंड को 'सफेद हाथी' बना दिया।

विजिलेंस जांच की तैयारी: सरकार की साख दांव पर

चूंकि मामला करोड़ों के गबन और एक क्लास-वन अधिकारी से जुड़ा है, इसलिए हरियाणा सरकार इस पर फूंक-फूंक कर कदम रख रही है। चर्चा है कि मुख्यमंत्री कार्यालय ने इस फाइल का कड़ा संज्ञान लिया है और इसे जल्द ही स्टेट विजिलेंस ब्यूरो को ट्रांसफर किया जा सकता है। विपक्ष ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरना शुरू कर दिया है, जिससे दबाव और बढ़ गया है। जानकारों का मानना है कि आने वाले कुछ दिनों में क्रेस्ट के दफ्तरों पर छापेमारी और कुछ बड़ी गिरफ्तारियां देखने को मिल सकती हैं। अब देखना यह है कि जांच की आंच कहां तक पहुंचती है और क्या इस घोटाले के 'मास्टरमाइंड' सलाखों के पीछे पहुंच पाएंगे।

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