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हरियाणा का 'ग्रीन' बजट: ₹100 करोड़ के फंड से बदलेगी पर्यावरण की सूरत, यमुना की सफाई के लिए मेगा प्लान

Apr 02, 2026 2:31 PM

हरियाणा। चंडीगढ़ के गलियारों से पर्यावरण को लेकर एक बड़ी और सकारात्मक खबर निकलकर आ रही है। प्रदेश की नायब सैनी सरकार ने जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए एक समर्पित 'हरियाणा ग्रीन क्लाइमेट रेजिलिएंट फंड' बनाने का फैसला किया है। वन एवं पर्यावरण मंत्री राव नरबीर सिंह के मुताबिक, यह फंड केवल सरकारी फाइलों की शोभा नहीं बढ़ाएगा, बल्कि इसका सीधा असर आम आदमी की रसोई से लेकर खेत-खलिहानों तक दिखेगा। 2026-27 के आगामी बजट में इसके लिए ₹100 करोड़ का शुरुआती फंड आवंटित किया जाना तय हुआ है, जिसका मुख्य उद्देश्य राज्य को 2070 तक 'जीरो एमिशन' यानी शून्य उत्सर्जन के राष्ट्रीय लक्ष्य की ओर ले जाना है।

बिजली-पानी की बचत और इलेक्ट्रिक वाहनों पर जोर

इस फंड के जरिए सरकार एक साथ कई मोर्चों पर काम करने वाली है। इसमें स्वच्छ ऊर्जा (Clean Energy) को बढ़ावा देने के साथ-साथ बिजली और पानी की बचत के लिए नई तकनीकों को प्रोत्साहित किया जाएगा। आने वाले समय में प्रदेश के शहरों में 'ग्रीन बेल्ट' का विस्तार होगा और इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) के लिए बुनियादी ढांचे को और मजबूत किया जाएगा। गांवों में जल संरक्षण की ऐसी प्रणालियां विकसित की जाएंगी जो खेती को बदलती जलवायु के अनुसार ढाल सकें।

यमुना की 'शुद्धि' के लिए 313 किलोमीटर का मिशन

हरियाणा की जीवनरेखा कही जाने वाली यमुना नदी को प्रदूषण मुक्त करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। मंत्री राव नरबीर सिंह ने संकेत दिए हैं कि 313 किलोमीटर लंबी यमुना के बहाव क्षेत्र में गिरने वाले सभी छोटे-बड़े नालों को वैज्ञानिक तरीके से ट्रीट किया जाएगा। योजना केवल गंदगी रोकने तक सीमित नहीं है; नदी के किनारों पर सघन वृक्षारोपण कर एक 'नेचुरल बफर' तैयार किया जाएगा, जिससे न केवल भूजल स्तर सुधरेगा बल्कि जैव विविधता को भी बढ़ावा मिलेगा।

मसानी बैराज: ₹150 करोड़ से सुधरेगी 17 गांवों की किस्मत

रेवाड़ी और धारूहेड़ा क्षेत्र के किसानों के लिए भी एक बड़ी राहत की खबर है। लंबे समय से मसानी बैराज में आ रहे दूषित पानी की समस्या का समाधान अब ₹150 करोड़ की संयुक्त परियोजना से होगा। इस प्रोजेक्ट में नेशनल हाईवे अथॉरिटी (NHAI) ₹100 करोड़ का बड़ा हिस्सा देगी, जबकि हरियाणा और राजस्थान सरकारें ₹25-25 करोड़ का योगदान करेंगी।

धारूहेड़ा क्षेत्र के दूषित पानी ने आसपास के करीब 17 गांवों की उपजाऊ जमीन को बंजर बना दिया है। नई योजना के तहत इस पानी के प्रवाह को वैज्ञानिक तरीके से मोड़कर और उसे पूरी तरह साफ (Treat) करके सिंचाई के योग्य बनाया जाएगा। इससे न केवल कृषि भूमि बचेगी, बल्कि क्षेत्र का पर्यावरण भी सुधरेगा। कुल मिलाकर, हरियाणा सरकार अब 'विकास' के साथ 'विरासत और पर्यावरण' को जोड़ने की दिशा में ठोस कदम बढ़ा चुकी है।

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