हरियाणा में 5 किमी दूर ढाणियों तक पहुंचेगी 24 घंटे बिजली, बजट सत्र में सरकार ने बदली नीति
Mar 11, 2026 11:07 AM
हरियाणा। हरियाणा विधानसभा के बजट सत्र के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों के लिए एक अहम फैसला सामने आया है। चंडीगढ़ में सदन की कार्यवाही के दौरान राज्य सरकार ने घोषणा की कि अब गांव से 5 किलोमीटर तक दूर बसी डेरा-ढाणियों में भी 24 घंटे घरेलू बिजली उपलब्ध कराई जाएगी। विकास एवं पंचायती राज मंत्री कृष्ण लाल पंवार ने बताया कि नई नीति लागू होने के बाद पहले की तुलना में अधिक ग्रामीण परिवारों को नियमित बिजली आपूर्ति का लाभ मिलेगा।
सरकार का कहना है कि यह फैसला उन परिवारों को ध्यान में रखकर लिया गया है जो गांव की सीमा से दूर खेतों या अलग बसे डेरों में रहते हैं। इन इलाकों में बिजली की स्थायी सुविधा नहीं होने से लोगों को लंबे समय से परेशानी का सामना करना पड़ रहा था।
डेरा-ढाणी के लिए बदली गई यूनिट की परिभाषा
बजट सत्र में मंत्री कृष्ण लाल पंवार ने बताया कि विभाग ने डेरा-ढाणी के लिए नई नीति तैयार की है। पहले किसी डेरा या ढाणी को एक यूनिट मानने के लिए वहां कम से कम 11 घर होना जरूरी था।
नई व्यवस्था के तहत अब 11 घर की शर्त हटा दी गई है। अगर किसी डेरा या ढाणी में 11 सदस्य रहते हैं तो उसे एक यूनिट मानते हुए बिजली कनेक्शन दिया जाएगा।
1 किलोमीटर से बढ़ाकर 5 किलोमीटर किया दायरा
सरकार ने बिजली आपूर्ति के दायरे में भी बड़ा बदलाव किया है। पहले गांव के लाल डोरे से केवल 1 किलोमीटर के दायरे में आने वाली ढाणियों को ही 24 घंटे बिजली आपूर्ति का लाभ मिलता था।
विधायकों ने सदन में मांग उठाई कि इस दायरे को बढ़ाया जाए ताकि दूर बसे परिवारों को भी राहत मिल सके। इस मांग को स्वीकार करते हुए सरकार ने अब यह सीमा बढ़ाकर 5 किलोमीटर कर दी है।
हजारों ग्रामीण परिवारों को मिलेगा फायदा
नई व्यवस्था लागू होने के बाद गांव से दूर खेतों या बाहरी हिस्सों में रहने वाले परिवारों को सीधे तौर पर फायदा मिलेगा। जिन ढाणियों तक पहले बिजली की नियमित सुविधा नहीं पहुंच पाती थी, वहां अब 24 घंटे घरेलू बिजली उपलब्ध कराने की योजना है।
इससे बच्चों की पढ़ाई, किसानों के दैनिक कामकाज और घरेलू सुविधाओं में सुधार आने की उम्मीद है। ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों को अब रात के समय भी स्थायी रोशनी और बिजली उपकरणों का इस्तेमाल करने में आसानी होगी।
ग्रामीण विकास को मिलेगा नया सहारा
सरकार का मानना है कि इस फैसले से ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार होगा। दूर बसे परिवारों को भी अब गांव जैसी बिजली सुविधा मिल सकेगी।
बिजली की स्थायी उपलब्धता से डेयरी, कृषि कार्य और छोटे घरेलू व्यवसायों को भी सहारा मिलेगा, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति मिलने की संभावना है।