हरियाणा में फाने जलाने वाले किसानों पर गिरी गाज, पहली बार 5 पर FIR और भारी जुर्माना
Apr 30, 2026 9:56 AM
हरियाणा। हरियाणा में गेहूं की कटाई के बाद खेतों में बचे अवशेष (फाने) जलाने की समस्या गंभीर होती जा रही है। पर्यावरण नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले किसानों पर अब प्रशासन ने कानूनी डंडा चलाना शुरू कर दिया है। रबी सीजन के इतिहास में पहली बार कार्रवाई करते हुए कृषि विभाग ने 5 किसानों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज कराई है। इसके साथ ही 4 किसानों पर आर्थिक दंड लगाते हुए 25,000 रुपये का जुर्माना ठोका गया है। हालांकि, सरकारी सख्ती के बाद भी जमीनी हकीकत डराने वाली है, क्योंकि बुधवार को महज 24 घंटों के भीतर प्रदेश में आगजनी के 376 नए मामले दर्ज किए गए।
इन जिलों में दर्ज हुए पहले मुकदमे
कृषि विभाग द्वारा 'हरसेक' (HARSAC) की सैटेलाइट रिपोर्ट के आधार पर की गई कार्रवाई में फरीदाबाद और पलवल के 2-2 किसानों सहित सिरसा के 1 किसान पर मुकदमा दर्ज किया गया है। जुर्माने की बात करें तो फरीदाबाद में दो मामलों में 10 हजार, पलवल में 5 हजार और सिरसा में एक मामले में 10 हजार रुपये की वसूली की गई है। अधिकारियों का कहना है कि बार-बार चेतावनी के बावजूद किसान फाने जलाकर मिट्टी की उर्वरता और पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
जींद और कैथल में आगजनी की बाढ़
इस सीजन में अब तक कुल 1327 मामले चिह्नित किए जा चुके हैं। बुधवार को आए आंकड़ों ने विभाग की चिंता बढ़ा दी है, जिसमें अकेले जींद जिले में सर्वाधिक 121 मामले मिले। वहीं कैथल में 55, करनाल में 47 और रोहतक में 29 जगहों पर खेतों में आग धधकती पाई गई। दक्षिण हरियाणा के फरीदाबाद और उत्तर के अंबाला-सिरसा में भी स्थिति बिगड़ती दिख रही है।
सीजन की रिपोर्ट: जींद और रोहतक 'हॉटस्पॉट'
1 अप्रैल से 29 अप्रैल तक की कुल रिपोर्ट देखें तो जींद 207 मामलों के साथ प्रदेश में पहले स्थान पर है। इसके ठीक पीछे रोहतक (196) और झज्जर (156) का नंबर आता है। सोनीपत, करनाल और कैथल जैसे धान के कटोरे कहे जाने वाले क्षेत्रों में भी फाने जलाने के मामले 100 के आंकड़े को पार कर चुके हैं। विभाग अब ड्रोन और स्थानीय टीमों के जरिए निगरानी और सख्त करने की तैयारी में है ताकि प्रदूषण के स्तर को बढ़ने से रोका जा सके।