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हरियाणा में बाढ़ से निपटने की महातैयारी! 14 मई को 13 जिलों में होगा मेगा मॉक ड्रिल, देखें पूरी लिस्ट

Apr 30, 2026 12:13 PM

हरियाणा। हरियाणा सरकार मानसून की दस्तक से पहले किसी भी संभावित बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए अपने तंत्र को चाक-चौबंद करने में जुट गई है। प्रदेश के 13 अति-संवेदनशील जिलों में आगामी 14 मई को राज्य स्तरीय बाढ़ मॉक ड्रिल का आयोजन किया जाएगा। यह कवायद राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) के वार्षिक कैलेंडर के तहत की जा रही है, ताकि मानसून के दौरान यदि नदियां उफान पर हों या जलभराव की स्थिति बने, तो प्रशासन और राहत टीमें बिना किसी देरी के एक्शन में आ सकें।

चार चरणों में परखी जाएगी प्रशासनिक मुस्तैदी

राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की वित्तीय आयुक्त डॉ. सुमिता मिश्रा ने इस मेगा ड्रिल की रूपरेखा साझा करते हुए बताया कि यह पूरा अभ्यास केवल एक दिन का खेल नहीं होगा, बल्कि इसे चार चरणों में अंजाम दिया जाएगा। इसकी शुरुआत 6 मई को एक ओरिएंटेशन (अभिविन्यास) बैठक से होगी। इसके बाद 12 मई को 'टेबल-टॉप' अभ्यास होगा, जिसमें कागजों और नक्शों पर रणनीति तैयार की जाएगी। अंत में 14 मई को जमीन पर वास्तविक ड्रिल होगी, जिसमें एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और स्थानीय पुलिस-प्रशासनिक टीमें राहत और बचाव का लाइव डेमो देंगी।

गुरुग्राम से सिरसा तक अलर्ट मोड पर जिला प्रशासन

बाढ़ की दृष्टि से संवेदनशील माने जाने वाले जिन 13 जिलों को इस ड्रिल के लिए चुना गया है, उनमें गुरुग्राम, अंबाला, फरीदाबाद, फतेहाबाद, कैथल, करनाल, कुरुक्षेत्र, पंचकूला, पानीपत, पलवल, सिरसा, सोनीपत और यमुनानगर शामिल हैं। यमुना और घग्गर नदी के किनारे बसे इन जिलों में अक्सर मानसून के दौरान चुनौतियां बढ़ जाती हैं। इस अभ्यास के जरिए न केवल संसाधनों और लॉजिस्टिक्स की उपलब्धता जांची जाएगी, बल्कि यह भी देखा जाएगा कि आपदा के समय सूचनाओं का आदान-प्रदान कितना सटीक और तेज है।

कमियों को सुधारने का मौका

इस मॉक ड्रिल का असल मकसद सरकारी फाइलों में दर्ज आपदा प्रबंधन योजनाओं को धरातल पर उतारना है। ड्रिल के दौरान प्रशासन यह देखेगा कि रिस्पांस टीमों को प्रभावित क्षेत्र तक पहुंचने में कितना समय लग रहा है और उनके पास उपलब्ध उपकरण कितनी बेहतर स्थिति में हैं। इसमें स्थानीय निकायों, स्वास्थ्य विभाग और मीडिया के साथ-साथ आम नागरिकों की भागीदारी भी सुनिश्चित की जाएगी, ताकि वास्तविक आपदा के समय भगदड़ या भ्रम की स्थिति पैदा न हो। सरकार का मानना है कि इस तरह के नियमित अभ्यासों से जान-माल के नुकसान को न्यूनतम स्तर पर लाया जा सकता है।

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