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हरियाणा में किसान आंदोलन शुरू: पानीपत और पंचकूला में हाईवे जाम, बायोमेट्रिक नियमों पर बवाल

Apr 11, 2026 12:33 PM

हरियाणा। हरियाणा की सियासत और सड़कों पर एक बार फिर किसान आंदोलन की तपिश महसूस की जा रही है। शनिवार को संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में किसानों ने चक्का जाम कर दिया। रबी की फसलों की खरीद के बीच सरकार द्वारा लागू किए गए नए नियमों ने किसानों के सब्र का बांध तोड़ दिया है। पानीपत के डाहर टोल प्लाजा पर किसानों ने नेशनल हाईवे को जाम कर अपना विरोध दर्ज कराया, वहीं पंचकूला में शिमला की ओर जाने वाले मुख्य मार्ग पर किसानों ने डेरा डाल दिया, जिससे यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई।

बायोमेट्रिक हाजिरी और पोर्टल की 'फंस' बनी जी का जंजाल

किसानों के इस गुस्से की सबसे बड़ी वजह मंडियों में शुरू की गई बायोमेट्रिक सत्यापन प्रणाली है। भारतीय किसान यूनियन के युवा प्रधान बिंटू मलिक और उप प्रधान अनिल कादियान का कहना है कि सरकार ने बिना तैयारी के तकनीकी जटिलताएं किसानों पर थोप दी हैं। बायोमेट्रिक सिस्टम अक्सर काम नहीं करता, जिसके कारण मंडियों के बाहर ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की लंबी कतारें लग रही हैं। किसानों का आरोप है कि सर्वर डाउन रहने और अंगूठे के निशान मैच न होने की वजह से घंटों तक गेट पास जारी नहीं हो पा रहे, जिससे फसल की तुलाई में कई-कई दिनों की देरी हो रही है।

अल्टीमेटम खत्म, अब सड़कों पर संग्राम

किसान संगठनों ने इन नियमों को वापस लेने के लिए सरकार को 10 अप्रैल तक का अल्टीमेटम दिया था। समय सीमा बीतने के बाद भी जब चंडीगढ़ से कोई सकारात्मक संकेत नहीं मिला, तो शनिवार सुबह 11 बजे से ही किसानों ने मोर्चा खोल दिया। पानीपत में आढ़ती एसोसिएशन ने भी किसानों को समर्थन देते हुए तीन घंटे तक गेहूं की तौल बंद रखी। किसानों का कहना है कि सरकार पिछली धान खरीद की गड़बड़ियों का बोझ अब गेहूं पैदा करने वाले किसानों पर डाल रही है, जिसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

शिमला हाईवे पर भारी जाम, यात्रियों की बढ़ी मुश्किलें

पंचकूला में किसानों के विरोध प्रदर्शन का सीधा असर पर्यटन पर भी पड़ा है। शिमला जाने वाले स्टेट हाईवे पर किसानों ने ट्रैक्टर खड़े कर जाम लगा दिया, जिससे सैकड़ों गाड़ियां रास्ते में ही फंस गईं। किसानों की मांग है कि बायोमेट्रिक की अनिवार्यता को तुरंत खत्म किया जाए और फसल नुकसान का उचित मुआवजा पोर्टल की खामियों को दूर कर सीधे किसानों के खाते में भेजा जाए। आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्द ही इन 'तुगलकी' नियमों को वापस नहीं लिया, तो आने वाले दिनों में यह आंदोलन और भी उग्र रूप ले सकता है।

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