सिरसा में किसानों का चक्का जाम: बायोमेट्रिक सिस्टम के विरोध में भावदीन टोल पर 4 घंटे रहा हंगामा
Apr 11, 2026 3:36 PM
सिरसा। सिरसा में जुटे किसानों की नाराजगी की सबसे बड़ी वजह सरकार के वो दो नए नियम हैं, जिन्हें प्रशासन 'पारदर्शिता' बता रहा है और किसान 'आफत'। दरअसल, इस बार गेहूं और सरसों की खरीद के लिए बायोमेट्रिक सत्यापन अनिवार्य किया गया है। किसान नेता लक्खा सिंह ने दो टूक कहा, "खेतों में हाड़-तोड़ मेहनत करने वाले किसान के हाथ हमेशा मिट्टी और काम से घिसे होते हैं। कई बार मशीन अंगूठे के निशान नहीं पकड़ती। ऐसे में किसान क्या मंडियों में अपनी फसल बेचने के बजाय अंगूठा मैच होने का इंतजार करता रहेगा?"
वहीं, ट्रैक्टर-ट्रॉली के कमर्शियल रजिस्ट्रेशन जैसा बोझ डालने की कोशिशों पर भी किसान भड़के हुए हैं। किसान नेता हरजिंद्र सिंह ने कहा कि ट्रैक्टर कोई माल ढोने वाला व्यापारिक ट्रक नहीं है, बल्कि किसान का औजार है। उस पर नए नियमों का बोझ डालना खेती को और घाटे का सौदा बनाना है।
डीएसपी के साथ तीखी बहस, पुलिस की घेराबंदी में गूंजे नारे
प्रदर्शन के दौरान भावदीन टोल पर भारी पुलिस बल की तैनाती रही। डीएसपी ने कई बार किसानों को समझाने और रास्ता खोलने की कोशिश की, लेकिन किसान अपनी मांगों पर अडिग रहे। इस दौरान कई बार प्रशासन और किसान नेताओं के बीच तीखी बहस भी देखने को मिली। जब पुलिस ने कानून-व्यवस्था का हवाला दिया, तो किसानों ने जवाब दिया कि उनकी आजीविका का सवाल कानून से बड़ा है।
विपक्षी दलों ने भी थामी किसानों की लाठी
इस आंदोलन को विपक्षी दलों का भी साथ मिलने लगा है। आम आदमी पार्टी के जिलाध्यक्ष हैप्पी सिंह ने अपने कार्यकर्ताओं के साथ धरना स्थल पर पहुंचकर किसानों को समर्थन दिया। उन्होंने कहा कि सरकार एयरकंडीशन कमरों में बैठकर नियम बनाती है, जबकि उसे यह नहीं पता कि मंडी की धूल में बायोमेट्रिक मशीनें अक्सर जवाब दे जाती हैं।
'भारत बंद' की दी चेतावनी
सिरसा के इस प्रदर्शन ने साफ कर दिया है कि किसान फिलहाल झुकने के मूड में नहीं हैं। किसान नेताओं ने मंच से हुंकार भरते हुए कहा कि यह सिर्फ ट्रेलर है। यदि 15 अप्रैल तक इन 'जटिल' नियमों को वापस नहीं लिया गया या इनमें ढील नहीं दी गई, तो आंदोलन का अगला पड़ाव 'पूरा भारत जाम' करना होगा। फिलहाल, दोपहर 3 बजे जाम तो खुल गया, लेकिन किसानों की चेतावनी ने सरकार और प्रशासन की नींद उड़ा दी है।