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हरियाणा सरकार का बड़ा फैसला: राशन वितरण के लिए 77.62 करोड़ रुपये मंजूर, डिपो होल्डर्स की बल्ले-बल्ले

May 06, 2026 11:51 AM

हरियाणा। हरियाणा के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग ने राज्य की सार्वजनिक वितरण प्रणाली को और अधिक पारदर्शी और मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के तहत राशन वितरण के खर्चों को कवर करने के लिए 77 करोड़ 62 लाख 88 हजार 779 रुपये की भारी-भरकम राशि को प्रशासनिक मंजूरी दे दी है। इस फैसले का सबसे बड़ा असर जमीन पर राशन बांटने वाले डिपो संचालकों और ढुलाई व्यवस्था पर पड़ेगा, जिन्हें अब पिछले कई महीनों के बकाया भुगतान की उम्मीद जगी है।

डिपो होल्डर्स और ट्रांसपोर्टेशन का होगा तुरंत निपटारा

जारी की गई नई वित्तीय मंजूरी में नवंबर 2025 के अंतर भुगतान के साथ-साथ दिसंबर 2025, जनवरी और फरवरी 2026 की राशन वितरण लागत को शामिल किया गया है। बजट का एक बड़ा हिस्सा 'फेयर प्राइस शॉप' (FPS) यानी राशन डिपो संचालकों के मार्जिन और कमीशन के लिए रखा गया है। इसके अलावा, कॉन्फेड को खाद्यान्न के उठान और परिवहन के लिए भी आवश्यक फंड आवंटित किया गया है। सरकारी आदेश के अनुसार, यह पूरा भुगतान जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक (DFSC), पंचकूला के माध्यम से रूट किया जाएगा, ताकि वितरण प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की देरी की गुंजाइश न रहे।

पारदर्शी भुगतान के लिए पुरानी व्यवस्था में बदलाव

प्रशासनिक गलियारों से आ रही खबरों के मुताबिक, सरकार ने इस बार रणनीति में बदलाव करते हुए पहले जारी किए गए कुछ टुकड़ों वाले स्वीकृति आदेशों को वापस ले लिया है। उनके स्थान पर अब एक 'समेकित मंजूरी' जारी की गई है, जिससे न केवल ऑडिट में आसानी होगी बल्कि भुगतान प्रक्रिया भी सुव्यवस्थित रहेगी। कॉन्फेड को सख्त हिदायत दी गई है कि सभी जिलों में खाद्यान्न वितरण से जुड़ी पार्टियों का भुगतान बिना किसी देरी के सुनिश्चित किया जाए। साथ ही, विभाग ने दो महीने के भीतर उपयोगिता प्रमाण पत्र (UC) जमा करने की समय-सीमा भी तय कर दी है।

आम जनता और डिपो संचालकों पर क्या होगा असर?

सरकार के इस फैसले का सीधा फायदा प्रदेश के लाखों राशन कार्ड धारकों को मिलेगा। जब डिपो संचालकों और परिवहन व्यवस्था का भुगतान समय पर होगा, तो पंचायत स्तर तक खाद्यान्न की उपलब्धता सुनिश्चित रहेगी। अक्सर कमीशन न मिलने के कारण डिपो संचालकों में रोष रहता था, जिससे वितरण व्यवस्था प्रभावित होती थी। अब इस वित्तीय ऑक्सीजन से न केवल डिपो संचालकों को आर्थिक राहत मिलेगी, बल्कि भ्रष्टाचार की संभावनाओं पर भी लगाम लगेगी क्योंकि पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन और पारदर्शी बनाया गया है।

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