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हरियाणा के सरकारी कर्मचारियों की मौज! अब शादी और गाड़ी के लिए सरकार देगी सीधा लोन

Apr 06, 2026 1:27 PM

हरियाणा। हरियाणा में सरकारी कर्मचारियों की लंबे समय से चली आ रही एक बड़ी दिक्कत को मुख्यमंत्री नायब सैनी ने चुटकियों में हल कर दिया है। प्रदेश सरकार ने साढ़े नौ साल पुराने उस फैसले को पलट दिया है, जिसने कर्मचारियों को निजी और सरकारी बैंकों के चक्कर काटने पर मजबूर कर दिया था। अब कर्मचारियों को अपनी निजी जरूरतों—जैसे घर बनाना, कार खरीदना, कंप्यूटर लेना या घर में शादी—के लिए बैंक मैनेजरों की खुशामद नहीं करनी होगी। वित्त विभाग ने आदेश जारी कर स्पष्ट कर दिया है कि अब लोन देने की जिम्मेदारी सीधी सरकार की होगी।

2016 का वो आदेश, जिसने बढ़ाई थी मुश्किलें

दरअसल, 4 नवंबर 2016 को तत्कालीन सरकार ने एक नीतिगत बदलाव किया था, जिसके तहत कर्मचारियों के लोन पोर्टफोलियो को पंजाब नेशनल बैंक (PNB) को स्थानांतरित कर दिया गया था। इससे कर्मचारियों को सरकारी ब्याज दरों और आसान किस्तों का लाभ मिलने में तकनीकी दिक्कतें आ रही थीं। वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अरुण गुप्ता द्वारा जारी ताजा निर्देशों के बाद अब मेजर हेड-7610 के अंतर्गत वार्षिक बजट प्रविधान के माध्यम से कर्मचारियों को सीधे ऋण या अग्रिम राशि प्रदान की जाएगी।

एलपीसी (LPC) के बदले स्वरूप से बढ़ेगी जवाबदेही

सरकार ने केवल लोन की प्रक्रिया ही आसान नहीं की है, बल्कि प्रशासनिक ढांचों में भी बड़े सुधार किए हैं। हरियाणा ट्रेजरी नियमों के तहत 'लास्ट पे सर्टिफिकेट' (LPC) के प्रारूप को पूरी तरह बदल दिया गया है। अब इसमें कर्मचारी का यूनिक कोड, परमानेंट रिटायरमेंट अकाउंट नंबर (PRAN) और पैन कार्ड जैसी जानकारियां अनिवार्य होंगी। यह बदलाव विशेष रूप से तब काम आएगा जब किसी कर्मचारी का तबादला एक दफ्तर से दूसरे दफ्तर में होता है। नए प्रारूप में सेवा की पूरी अवधि के सत्यापन का कॉलम भी जोड़ा गया है, जिससे भविष्य में पेंशन और अन्य लाभों में होने वाली देरी से बचा जा सकेगा।

पारदर्शिता और आधुनिक बैंकिंग का संगम

संशोधित प्रारूप में अब कर्मचारी के पे-लेवल, बेसिक-पे और अलाउंस के साथ-साथ इनकम टैक्स, जीपीएफ (GPF) सब्सक्रिप्शन और एडवांस रिकवरी का पूरा ब्योरा दर्ज होगा। अधिकारियों का मानना है कि इस डायरेक्ट लोन व्यवस्था से न केवल कर्मचारियों को मानसिक शांति मिलेगी, बल्कि वित्तीय प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही भी बढ़ेगी। अब कर्मचारी सीधे अपने विभाग के माध्यम से आवेदन कर सकेंगे और स्वीकृत राशि सीधे उनके बैंक खाते में बिना किसी बिचौलिए या भारी बैंकिंग औपचारिकता के पहुंच जाएगी।

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