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हरियाणा के किसानों की बल्ले-बल्ले! हरी खाद बनाने पर अब सरकार देगी सीधे नकद सब्सिडी

Apr 06, 2026 11:28 AM

हरियाणा। प्रदेश के अन्नदाता अब पारंपरिक खेती के ढर्रे को छोड़कर आधुनिक और प्राकृतिक तकनीकों को अपना रहे हैं। हरियाणा सरकार ने इस बदलाव को रफ्तार देने के लिए अपनी सब्सिडी नीति में एक महत्वपूर्ण संशोधन किया है। अब तक सरकार किसानों को ढैंचा का बीज मुफ्त मुहैया कराती थी, लेकिन अब रणनीति बदल दी गई है। नई व्यवस्था के तहत किसान खुद ढैंचा, उड़द या मूंग का बीज खरीदकर फसल तैयार करेंगे और उसे खेत में ही जोतकर खाद बनाएंगे, जिसके बदले सरकार उन्हें प्रति एकड़ 1,000 रुपये की आर्थिक मदद देगी।

पोर्टल पर फोटो अपलोड करते ही खाते में आएंगे पैसे

कृषि विभाग ने इस प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए इसे डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ दिया है। सब्सिडी पाने के इच्छुक किसानों को 'मेरी फसल-मेरा ब्योरा' पोर्टल पर अपनी फसल का ब्योरा देना होगा। केवल पंजीकरण ही काफी नहीं है, बल्कि खाद बनाने से पहले खेत में खड़ी फसल की लाइव फोटो भी पोर्टल पर संलग्न करनी होगी। कृषि अधिकारियों का मानना है कि इस कदम से न केवल भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी, बल्कि वास्तविक मेहनत करने वाले किसानों को सीधा लाभ मिल सकेगा।

यूरिया-डीएपी का विकल्प: मिट्टी को मिलेगा 'सुपरफूड'

प्राकृतिक खेती की दिशा में हरी खाद को 'मिट्टी का सुपरफूड' माना जाता है। ढैंचा की फसल जब कमर तक ऊंची हो जाती है, तब उस पर ट्रैक्टर चलाकर उसे मिट्टी में मिला दिया जाता है। यह प्रक्रिया जमीन को नाइट्रोजन, फास्फोरस और जिंक जैसे सूक्ष्म तत्वों से लबालब कर देती है। ठीक इसी तरह, मूंग और उड़द की फलियां तोड़ने के बाद उनके पौधों को खेत में ही गलाने से जैविक उर्वरक क्षमता (Organic Matter) में जबरदस्त इजाफा होता है। इससे न केवल फसल की गुणवत्ता सुधरती है, बल्कि आने वाले समय में खाद पर होने वाला मोटा खर्च भी बचता है।

आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम

हरियाणा सरकार की इस पहल के पीछे का असली मकसद किसानों को बाजारू खाद और महंगे रसायनों के बोझ से मुक्ति दिलाना है। पिछले कुछ वर्षों में जिस तरह से यूरिया और डीएपी की किल्लत और बढ़ती कीमतों ने किसानों को परेशान किया है, उसे देखते हुए हरी खाद एक टिकाऊ और सस्ता विकल्प बनकर उभरी है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि अगर प्रदेश का बड़ा हिस्सा इस तकनीक को अपनाता है, तो न केवल भू-जल प्रदूषित होने से बचेगा, बल्कि उपभोक्ता को भी जहर मुक्त और पौष्टिक अनाज मिल सकेगा।

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