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590 करोड़ का बैंक घोटाला: अब सीबीआई खंगालेगी अफसरों की कुंडली, भ्रष्टाचार की परतों से हटेगा पर्दा

Apr 09, 2026 11:32 AM

हरियाणा। हरियाणा के प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचाने वाले 590 करोड़ रुपये के आईडीएफसी बैंक घोटाले में अब निर्णायक मोड़ आने वाला है। सूत्रों की मानें तो केंद्र सरकार इसी सप्ताह इस हाई-प्रोफाइल मामले की जांच सीबीआई को सौंपने की औपचारिक मंजूरी दे सकती है। हरियाणा सरकार ने करीब 10 दिन पहले ही इस बड़े वित्तीय फ्रॉड की निष्पक्ष जांच के लिए सीबीआई को पत्र लिखा था। वर्तमान में इस मामले की कमान संभाल रही एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) को जांच के दौरान ऐसे पुख्ता संकेत मिले हैं कि इस पूरे खेल के पीछे सचिवालय के कुछ रसूखदार अधिकारियों की शह रही है।

बिना मंजूरी के नपेंगे बड़े साहब, सीबीआई का होगा अपना वारंट

इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि एक बार सीबीआई के हाथ में केस जाने के बाद उन 5 आईएएस अधिकारियों के खिलाफ जांच और पूछताछ का रास्ता साफ हो जाएगा, जिनका नाम एसीबी की पूछताछ में सामने आया है। सामान्य प्रक्रिया में धारा 17ए के तहत सरकार से मंजूरी लेनी पड़ती है, लेकिन जब राज्य खुद जांच की सिफारिश करता है, तो सीबीआई के पास सीधे कार्रवाई के अधिकार होते हैं। निष्पक्षता बनाए रखने के लिए इस जांच टीम में हरियाणा कैडर के किसी भी अधिकारी को शामिल नहीं किया जाएगा, ताकि किसी भी तरह के स्थानीय दबाव या प्रभाव की गुंजाइश न रहे।

फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) के नाम पर हुआ फर्जीवाड़ा

यह घोटाला उस समय उजागर हुआ जब हरियाणा सरकार के 18 विभागों ने अपनी करीब 590 करोड़ की राशि आईडीएफसी बैंक में निवेश के लिए जमा कराई थी। जब एक विभाग ने अपना पैसा वापस निकालना चाहा, तो पता चला कि बैंक के रिकॉर्ड और विभाग के बैलेंस में जमीन-आसमान का अंतर है। जांच में सामने आया कि बैंक मैनेजर रिभव ऋषि और रिलेशनशिप मैनेजर अभय ने मिलकर सरकारी खजाने का पैसा एफडी में जमा करने के बजाय उसे निजी खातों और फर्जी फर्मों में डायवर्ट कर दिया। इस पैसे का इस्तेमाल प्रॉपर्टी खरीदने और शेयर बाजार में निवेश के लिए किया गया।

तीन विभागों की मिलीभगत और एसीबी की कार्रवाई

यह फ्रॉड मुख्य रूप से प्रदूषण विभाग, पंचायत विभाग और नगर निगम से जुड़ा है। एसीबी ने अब तक बैंक मैनेजर सहित ज्वैलर्स और सरकारी वित्त अधिकारियों को गिरफ्तार किया है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी इस मामले में 19 ठिकानों पर छापेमारी कर चुका है, क्योंकि इसमें भारी भरकम राशि को 'लॉन्डर' किया गया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने स्पष्ट कर दिया है कि भ्रष्टाचार के इस संगठित गिरोह में शामिल किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह कितना ही बड़ा अधिकारी क्यों न हो। अब सबकी नजरें सीबीआई की एफआईआर पर टिकी हैं।

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