हरियाणा में 750 करोड़ के घोटाले में 2 IAS अधिकारी सस्पेंड, मची खलबली
Apr 09, 2026 1:58 PM
चंडीगढ़। हरियाणा के प्रशासनिक इतिहास में संभवतः यह सबसे बड़ा मौका है जब भ्रष्टाचार की आंच में एक साथ दो वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों को झुलसना पड़ा है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के निर्देश पर सरकार ने आईएएस आर.के. सिंह (राम कुमार सिंह) और आईएएस प्रदीप कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इन दोनों अधिकारियों के सस्पेंशन के आदेश जारी होते ही चंडीगढ़ स्थित सचिवालय से लेकर जिला मुख्यालयों तक हड़कंप मच गया है। यह कार्रवाई उस आईडीएफसी फर्स्ट बैंक घोटाले से जुड़ी है, जिसने पिछले कुछ हफ्तों से हरियाणा की सियासत और प्रशासन को हिलाकर रखा हुआ है।
फर्जी डेबिट मेमो और करोड़ों का गबन
सूत्रों के मुताबिक, इस महाघोटाले की जड़ें सरकारी विभागों के उन खातों में छिपी हैं, जहाँ से करीब 750 करोड़ रुपये की हेराफेरी की आशंका है। जांच में सामने आया है कि फर्जी डेबिट मेमो और जाली दस्तावेजों के जरिए सरकारी खजाने के पैसे को निजी खातों में डायवर्ट किया गया। एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की शुरुआती तफ्तीश में इन दोनों अधिकारियों की भूमिका पर गंभीर सवाल उठे थे। बताया जा रहा है कि संबंधित विभागों में तैनाती के दौरान फंड मैनेजमेंट और बैंक खातों के संचालन में बरती गई लापरवाही या कथित संलिप्तता के चलते इन पर यह गाज गिरी है।
एसीबी के इनपुट पर सीएम का कड़ा एक्शन
बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के पास एसीबी की एक विस्तृत रिपोर्ट पहुंची थी, जिसमें इन अधिकारियों के खिलाफ ठोस संकेत मिले थे। चूंकि सरकार पहले ही इस मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से कराने की सिफारिश केंद्र को भेज चुकी है, ऐसे में साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ न हो और जांच निष्पक्ष रहे, इसके लिए निलंबन का रास्ता अपनाया गया। यह कार्रवाई उन अधिकारियों के लिए भी एक सीधा संदेश है जो अब तक खुद को व्यवस्था से ऊपर समझते रहे हैं।
अभी और गिरेंगी गाज? जांच के दायरे में कई और विभाग
750 करोड़ रुपये का यह आंकड़ा केवल एक शुरुआत भर माना जा रहा है। जांच एजेंसियों को संदेह है कि इस घोटाले के तार कई अन्य विभागों और उनके आला अधिकारियों से भी जुड़े हो सकते हैं। आने वाले दिनों में कुछ और बड़े नामों पर कार्रवाई की तलवार लटक रही है। फिलहाल, दोनों निलंबित अधिकारियों को मुख्यालय रिपोर्ट करने के निर्देश दिए गए हैं। अब सबकी नजरें सीबीआई की औपचारिक एंट्री पर टिकी हैं, जिसके बाद इस 'सफेदपोश' घोटाले के असली किरदारों के चेहरे पूरी तरह बेनकाब हो सकेंगे।