हड़ताल खत्म होते ही कचरा मुक्ति की जंग शुरू, 24 घंटे काम करेंगे सफाईकर्मी, हफ्तेभर में सुधरेगी सूरत
May 15, 2026 3:01 PM
कुरुक्षेत्र। हरियाणा में नगर पालिका और दमकल कर्मचारियों की लंबी हड़ताल खत्म होने के बाद अब सरकार और प्रशासन के सामने शहरों को वापस रहने लायक बनाने की सबसे बड़ी चुनौती है। सवा महीने से ठप पड़ी सफाई व्यवस्था के कारण सूबे की सड़कों और गलियों में करीब 13 हजार टन कचरे का पहाड़ खड़ा हो गया है। इस संकट से निपटने के लिए शहरी स्थानीय निकाय निदेशालय (ULB) पूरी तरह हरकत में आ गया है। निदेशालय ने साफ कर दिया है कि वीआईपी इलाकों के बजाय सबसे पहले उन जगहों से कूड़ा उठाया जाए, जहां जनता का सीधा सरोकार है—जैसे अस्पताल, स्कूल, बस स्टैंड और मुख्य बाजार।
जोन में बंटे शहर, प्राइवेट एजेंसियों को भी झोंका
कूड़े के इस विशालकाय ढेर को ठिकाने लगाने के लिए नगर निगमों और परिषदों ने पूरे चाक-चौबंद इंतजाम किए हैं। शहरों को अलग-अलग जोन में बांटकर कर्मचारियों की फौज तैनात कर दी गई है। सरकारी अमले के साथ-साथ अब निजी एजेंसियों के सफाईकर्मियों को भी मैदान में उतारा गया है, जो दिन और रात की अलग-अलग शिफ्टों में 'नॉन-स्टॉप' काम करेंगे। अधिकारियों का कहना है कि मुख्य सड़कों से कचरा हटाने में तीन से चार दिन का समय लगेगा, लेकिन अंदरूनी गलियों और वार्डों की स्थिति पूरी तरह सामान्य होने में कम से कम एक हफ्ता लग जाएगा। कचरा उठाने के बाद संक्रमण न फैले, इसके लिए फॉगिंग और चूना छिड़कने के भी निर्देश दिए गए हैं।
देर रात तक गूंजेगा 'कचरा गाड़ी' का सायरन
आम दिनों में सुबह आने वाली डोर-टू-डोर गारबेज गाड़ियां अब सुबह से लेकर देर रात तक कॉलोनियों के चक्कर लगाएंगी। लगातार जमा हो रहे बैकलाग को खत्म करने के लिए वाहनों के फेरे बढ़ा दिए गए हैं। प्रशासनिक अधिकारियों ने आम जनता से भी सहयोग की अपील की है कि जब तक कूड़ा उठाने वाली गाड़ी गली में न आए, तब तक घरों का कचरा बाहर सड़कों या खाली प्लॉटों में न फेंकें। इस आफत के बीच राहत की बात यह है कि सफाईकर्मियों के वापस काम पर लौटने से शहरों में फैली सड़ांध और महामारी का खतरा अब धीरे-धीरे कम होने की उम्मीद है।