स्कूल से घर लौटते वक्त कैंटर ने छीना था इकलौता बेटा, अब कुरुक्षेत्र अदालत ने तय किया ₹18 लाख का मुआवजा
May 15, 2026 3:57 PM
कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र के मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल ने सड़क दुर्घटनाओं में अपनों को खोने वाले परिवारों के हक में एक बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने करीब दो साल पहले अंबाला के साहा क्षेत्र में हुए एक दर्दनाक हादसे का निपटारा करते हुए मृतक 19 वर्षीय नितिन के माता-पिता को ₹17,96,300 की मुआवजा राशि देने का आदेश जारी किया है। खास बात यह है कि पीड़ित परिवार को यह रकम याचिका दायर करने की तारीख से लेकर भुगतान के दिन तक छह फीसदी सालाना ब्याज के साथ मिलेगी, जिससे उन्हें एक बड़ी वित्तीय राहत नसीब होगी।
स्कूल से लौटते वक्त कैंटर ने छीनी थी घर की उम्मीद
यह पूरा मामला 26 फरवरी 2024 का है, जब 19 साल का नितिन अपनी मोटरसाइकिल पर अंबाला के नहोनी स्थित कृष्णा स्कूल से छुट्टी होने के बाद वापस अपने घर साहा लौट रहा था। सफर के दौरान नितिन का मामा संदीप भी अपनी दूसरी बाइक पर उसके ठीक पीछे-पीछे चल रहा था। जैसे ही दोनों जगाधरी रोड पर भारत पेट्रोल पंप के पास पहुंचे, तभी सामने से आ रहे एक बेकाबू कैंटर ने नितिन की मोटरसाइकिल को सामने से सीधी टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि नितिन ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। इस दर्दनाक घटना के बाद अंबाला के साहा थाने में आरोपी कैंटर चालक के खिलाफ लापरवाही से गाड़ी चलाने और हत्या की धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ था।
बीमा कंपनी की दलीलें कोर्ट में हुईं पस्त
नितिन की असमय मौत के बाद दुखों से घिरे माता-पिता पूनम और महेंद्र ने मोटर वाहन अधिनियम के तहत ₹40 लाख के मुआवजे का दावा ठोकते हुए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। सुनवाई के दौरान बीमा कंपनी ने मामले को लटकाने और अपनी जिम्मेदारी से बचने के लिए कई कानूनी अड़चनें पैदा करने की कोशिश की। कंपनी के वकीलों ने तर्क दिया कि हादसा कैंटर चालक की वजह से नहीं हुआ, बल्कि नितिन खुद बिना ड्राइविंग लाइसेंस के गाड़ी चला रहा था और उसी की लापरवाही से यह एक्सीडेंट हुआ। हालांकि, ट्रिब्यूनल ने कंपनी की इन तमाम दलीलों को सिरे से खारिज कर दिया।
गवाहों और सबूतों के आधार पर तय हुई जिम्मेदारी
अदालत ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए हादसे के वक्त मौके पर मौजूद नितिन के मामा संदीप की आंखों देखी गवाही, पुलिस की चार्जशीट और पोस्टमार्टम रिपोर्ट को मुख्य आधार माना। ट्रिब्यूनल ने एक बेहद अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि मोटर दुर्घटना के मामलों में फैसला 'संभावनाओं के संतुलन' (Balance of Probabilities) के सिद्धांत पर होता है, न कि किसी आपराधिक मामले की तरह संदेह से परे सबूतों के आधार पर। चूंकि हादसे के वक्त कैंटर का बीमा वैध था और उसके ड्राइवर का लाइसेंस भी सही पाया गया, इसलिए कोर्ट ने मुआवजे की पूरी जिम्मेदारी बीमा कंपनी पर तय करते हुए पीड़ित माता-पिता को न्याय दिया।