Haryana AAS App: हरियाणा सरकार का बड़ा फैसला, अब व्हाट्सएप नंबर पर दर्ज होगी सरकारी काम में देरी की शिकायत
May 23, 2026 11:06 AM
हरियाणा। हरियाणा में अब सरकारी बाबू काम अटकाने या तय समय पर फाइल आगे न बढ़ाने की मनमानी नहीं कर सकेंगे। हरियाणा सेवा का अधिकार आयोग ने जनता को ताकत देते हुए साल 2025-26 की अपनी सालाना रिपोर्ट सार्वजनिक कर दी है। इस रिपोर्ट के साथ ही मुख्य आयुक्त टीसी गुप्ता ने चंडीगढ़ से आम लोगों की सहूलियत के लिए एक बड़ा डिजिटल टूल पेश किया है। अब राज्य में ऑटो अपील सिस्टम (AAS) का व्हाट्सएप चैटबॉट और मोबाइल ऐप आधिकारिक तौर पर काम करने लगा है। इस नई व्यवस्था का सबसे सीधा और बड़ा असर यह होगा कि प्रमाण पत्र बनवाने या पेंशन लगवाने के लिए आपको किसी भी सरकारी दफ्तर के बाहर लाइन में खड़े होने या बाबू के सामने हाथ जोड़ने की रत्ती भर भी जरूरत नहीं है।
अब अगर किसी नागरिक का काम तय समय सीमा के भीतर पूरा नहीं होता है, तो वह अपने फोन से सीधे व्हाट्सएप नंबर 6239466937 पर एक सामान्य मैसेज भेज सकता है। इस चैटबॉट के जरिए आप अपनी रुकी हुई सेवा की वास्तविक स्थिति जान सकते हैं और सीधे अधिकारियों के खिलाफ अपनी अपील भी दर्ज करा सकते हैं।
जन्म प्रमाण पत्र से लेकर बिजली कनेक्शन तक; एक ही ऐप पर 56 विभागों का लेखा-जोखा
हरियाणा सरकार के इस नए AAS मोबाइल ऐप के भीतर राज्य के 56 अलग-अलग विभागों की कुल 802 महत्वपूर्ण सेवाओं को शामिल किया गया है। इसका मतलब यह है कि आम आदमी के जीवन से जुड़ी लगभग हर छोटी-बड़ी कागजी कार्रवाई अब इस सिस्टम के दायरे में आ चुकी है। उदाहरण के तौर पर देखें तो जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र, जाति या रिहायशी (डोमिसाइल) सर्टिफिकेट, कोर्ट मैरिज रजिस्ट्रेशन, बुढ़ापा और अन्य सामाजिक सुरक्षा पेंशन, बिजली और पानी के नए कनेक्शन, फैक्टरी या दुकान का लाइसेंस और मकान का नक्शा पास कराने जैसी तमाम सेवाएं अब इस ऐप पर उपलब्ध होंगी।
हरियाणा के कैथल, रोहतक, हिसार या गुरुग्राम जैसे किसी भी जिले के दूर-दराज के गांवों में रहने वाले लोगों के लिए यह ऐप एक सिंगल-विंडो की तरह काम करेगा, जहां अधिकारियों की जवाबदेही सीधे तौर पर तय होगी।
तय समय पर निपटे 94% से ज्यादा काम; देश के लिए 'हरियाणा मॉडल' बना मिसाल
आयोग द्वारा पेश किए गए ताजा आंकड़ों के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान प्रदेश भर से रिकॉर्ड 2.06 करोड़ से ज्यादा आवेदन अलग-अलग सरकारी सेवाओं के लिए प्राप्त हुए थे। आयोग के मुस्तैद सिस्टम का नतीजा यह रहा कि इनमें से 94.71 फीसदी आवेदनों का निपटारा तय समय सीमा के भीतर कर दिया गया। वहीं, जिन मामलों में देरी हुई, उनमें से 28.5 लाख से ज्यादा अपीलें ऑटो अपील सिस्टम (AAS) पर खुद-ब-खुद दर्ज हो गईं। राहत की बात यह है कि इन अपीलों में से भी 98 प्रतिशत से अधिक मामलों को सुलझाया जा चुका है।
आयोग के मुख्य आयुक्त टीसी गुप्ता ने इस कामयाबी पर बात करते हुए कहा कि साल 2021 में शुरू किया गया ऑटो अपील सिस्टम (AAS) प्रशासनिक सुधार की दिशा में देश का सबसे बड़ा क्रांतिकारी कदम साबित हुआ है। हरियाणा का यह डिजिटल मॉडल अब देश के दूसरे राज्यों के लिए भी एक नजीर बन रहा है और खुद केंद्र सरकार ने इस बेहतरीन प्रशासनिक सुधार की खुलकर सराहना की है।
दफ्तरों के चक्करों से बुजुर्गों और ग्रामीणों को मिली परमानेंट मुक्ति
इस पूरे डिजिटल इकोसिस्टम का सबसे मानवीय और सुखद पहलू यह है कि इससे राज्य के ग्रामीण अंचलों में रहने वाले बुजुर्गों, दिहाड़ी मजदूरों और गरीब तबके को बड़ी राहत मिली है। पहले एक छोटे से सर्टिफिकेट के लिए ग्रामीणों को अपना काम-धंधा छोड़कर बार-बार तहसील या जिला मुख्यालय जाना पड़ता था, जिससे उनकी दिहाड़ी का नुकसान होता था और बस का किराया अलग से लगता था।
अब न सिर्फ आवेदन और अपील घर बैठे हो रही है, बल्कि विवादित मामलों में अपीलों की सुनवाई भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के जरिए की जा रही है। ऐसे में किसी बुजुर्ग को अपनी पेंशन की शिकायत के लिए चंडीगढ़ आने की कोई मजबूरी नहीं रह गई है। अगर समय पर काम नहीं हुआ, तो यह ऑटोमैटिक सिस्टम खुद ही फाइल को उच्च अधिकारी के पास फॉरवर्ड कर देता है, जिससे जनता को यह सोचने की जरूरत ही नहीं पड़ती कि शिकायत लेकर किस चौखट पर जाना है।