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हरियाणा में सफाई संकट: आज से 30 हजार कर्मचारी हड़ताल पर, शहरों में लग सकते हैं गंदगी के ढेर

May 01, 2026 12:12 PM

हरियाणा। हरियाणा के शहरों में आज से कूड़े के ढेर लगने और फायर सेवाओं के प्रभावित होने की आशंका गहरा गई है। नगर पालिका कर्मचारी संघ और सरकार के बीच गुरुवार को हुई अंतिम दौर की बातचीत भी सिरे नहीं चढ़ सकी। शहरी निकाय विभाग के आयुक्त एवं सचिव अशोक मीणा ने सफाई अभियान और जनता की असुविधा का हवाला देकर हड़ताल टालने की अपील की थी, लेकिन कर्मचारी नेता अपनी मांगों पर अड़े रहे। नतीजतन, शुक्रवार सुबह से प्रदेश के करीब 30 हजार सफाई और फायर कर्मियों ने सामूहिक अवकाश लेकर काम बंद कर दिया है।

30 हजार वेतन और पक्की नौकरी की जिद

कर्मचारी संघ के प्रदेशाध्यक्ष नरेश कुमार शास्त्री ने साफ कर दिया है कि यह लड़ाई अब आत्मसम्मान की है। संघ की स्पष्ट मांग है कि सफाई और सीवर के काम से ठेका प्रथा को पूरी तरह समाप्त किया जाए। इसके अलावा, जो कर्मचारी लंबे समय से ठेके पर काम कर रहे हैं, उन्हें विभाग के रोल पर लिया जाए और उनका न्यूनतम वेतन बढ़ाकर 30,000 रुपये किया जाए। कर्मचारियों का कहना है कि सरकार बार-बार आश्वासन तो देती है, लेकिन जब पत्र जारी करने की बारी आती है, तो कदम पीछे खींच लिए जाते हैं।

सरकार का पलटवार: हड़ताल पर जाने वालों की कटेगी सैलरी

हड़ताल के ऐलान के साथ ही खट्टर सरकार के शहरी निकाय विभाग ने भी अपने तेवर कड़े कर लिए हैं। विभाग की ओर से सभी नगर निकायों को लिखित आदेश जारी कर दिए गए हैं कि जो भी कर्मचारी ड्यूटी से नदारद रहेगा, उसका उस दिन का वेतन काट लिया जाए। सरकार की इस सख्ती ने टकराव की स्थिति को और बढ़ा दिया है। प्रशासनिक अधिकारियों को वैकल्पिक इंतजाम करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि शहरों की सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा न जाए, हालांकि इतनी बड़ी संख्या में कर्मियों के बिना यह काम चुनौतीपूर्ण नजर आ रहा है।

2 मई के बाद और उग्र हो सकता है आंदोलन

आंदोलन की आंच अब तेज होने वाली है। संघ ने सरकार को अल्टीमेटम दिया है कि यदि 2 मई तक उनकी मांगों पर ठोस समाधान नहीं निकाला गया, तो इस हड़ताल को अनिश्चितकाल के लिए आगे बढ़ा दिया जाएगा। शास्त्री ने चेतावनी दी है कि सरकार दमनकारी नीतियां छोड़कर कर्मचारियों के हितों पर ध्यान दे। यदि शनिवार तक कोई सकारात्मक संदेश नहीं मिला, तो पूरे प्रदेश के नगर निकाय ठप कर दिए जाएंगे। अब देखना यह होगा कि शहरों की स्वच्छता और कर्मचारियों की मांगों के बीच सरकार बीच का रास्ता कैसे निकालती है।

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