हरियाणा सरकार का बड़ा फैसला: 8 लाख ट्यूबवेलों के पानी की होगी जांच, सेमग्रस्त जमीन बनेगी उपजाऊ
Mar 23, 2026 12:17 PM
हरियाणा। हरियाणा के उन किसानों के लिए राहत भरी खबर है जिनकी उपजाऊ जमीन सेम और खारेपन की मार झेल रही है। मुख्यमंत्री नायब सैनी के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने प्रदेश की कृषि योग्य भूमि को बचाने के लिए एक व्यापक कार्ययोजना तैयार की है। सरकार ने तय किया है कि प्रदेश के लगभग 8 लाख ट्यूबवेलों के पानी की सघन जांच कराई जाएगी, ताकि सिंचाई और पेयजल में आर्सेनिक, फ्लोराइड और हानिकारक बैक्टीरिया के स्तर का सटीक पता चल सके। नए वित्तीय वर्ष में ही करीब 3 लाख ट्यूबवेलों की सैंपलिंग का लक्ष्य रखा गया है, जिससे किसानों को यह समझने में मदद मिलेगी कि उनके खेत की मिट्टी और पानी का तालमेल कैसा है।
वर्टिकल ड्रेनेज तकनीक: सेम की समस्या का स्थायी समाधान
झज्जर, रोहतक, सोनीपत और भिवानी जैसे जिलों में हजारों एकड़ जमीन 'सेम' (जलभराव) के कारण सफेद चादर में तब्दील हो चुकी है। कृषि विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, इस जमीन को दोबारा जीवित करने के लिए 'वर्टिकल और सब-सरफेस ड्रेनेज' तकनीक का सहारा लिया जा रहा है। इस विधि से जमीन के नीचे जमा खारे पानी को बाहर निकाला जाता है, जिससे मिट्टी की उर्वरता वापस लौटने लगती है। केंद्र सरकार के सहयोग से साल 2029 तक प्रदेश की 4.21 लाख एकड़ भूमि को इस समस्या से मुक्त करने का ब्लूप्रिंट तैयार है। अच्छी खबर यह है कि मौजूदा साल में 1 लाख एकड़ के लक्ष्य के मुकाबले अब तक 92 हजार एकड़ जमीन सुधारी जा चुकी है।
खारेपन में छिपी है कमाई: झींगा पालन को बढ़ावा
कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा ने स्पष्ट किया कि सरकार केवल जमीन सुधार तक ही सीमित नहीं है, बल्कि जहां खेती संभव नहीं है, वहां किसानों की आय बढ़ाने के वैकल्पिक रास्ते भी खोल रही है। जिन इलाकों का पानी अत्यधिक खारा है, वहां मत्स्य पालन और विशेषकर 'झींगा पालन' (Shrimp Farming) को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इन परियोजनाओं के लिए सरकार किसानों को मोटी सब्सिडी दे रही है, जिससे बंजर मानी जाने वाली जमीन भी अब लाखों का मुनाफा देने लगी है।
प्रदूषण मुक्त पानी और उपजाऊ धरा का संकल्प
पानी की जांच का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रदूषकों की वजह से फसलें खराब न हों और मानव स्वास्थ्य पर भी इसका विपरीत असर न पड़े। गुरुग्राम और रोहतक जैसे औद्योगिक बेल्ट के आसपास के गांवों में पानी की गुणवत्ता अक्सर चिंता का विषय रहती है। सरकार की इस पहल से न केवल भूमि का स्वास्थ्य सुधरेगा, बल्कि किसानों को वैज्ञानिक तरीके से खेती करने के लिए जरूरी डेटा भी उपलब्ध होगा।