हरियाणा में मौसम का तांडव: गेहूं की फसल पर गिरे ओले, अब अप्रैल में 7 पश्चिमी विक्षोभ मचाएंगे तबाही
Apr 02, 2026 10:10 AM
हरियाणा। चंडीगढ़ समेत हरियाणा के तमाम जिलों में इस बार कुदरत के तेवर किसानों की मेहनत पर भारी पड़ रहे हैं। मार्च के महीने में जिस तपिश की उम्मीद थी, वहां बेमौसम बरसात और ओलावृष्टि ने दस्तक दे दी। रोहतक, रेवाड़ी और आसपास के इलाकों में हुई भारी बारिश ने खेतों में खड़ी सुनहरी गेहूं की फसल को मिट्टी में मिला दिया है।
तेज हवाओं के कारण गेहूं की बालियां टूटकर जमीन पर गिर गई हैं, जिससे दानों की क्वालिटी और पैदावार दोनों पर बुरा असर पड़ना तय है। मार्च में हुई सामान्य से 19 प्रतिशत अधिक बारिश ने खेती के गणित को पूरी तरह बिगाड़ दिया है।
अप्रैल में 'सप्त-विक्षोभ' का साया: राहत के आसार नहीं
मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की ताजा रिपोर्ट ने हरियाणा के अन्नदाता की टेंशन और बढ़ा दी है। मौसम विशेषज्ञ डॉ. चंद्रमोहन की मानें तो अप्रैल का पूरा महीना उथल-पुथल भरा रहने वाला है। एक के बाद एक करीब 7 पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) सक्रिय हो रहे हैं।
इसकी शुरुआत 2 और 3 अप्रैल से होने जा रही है, जब प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में गरज-चमक के साथ आंधी और बारिश की संभावना है। इसके ठीक बाद 7-8 अप्रैल को भी मौसम का दूसरा कड़ा स्पैल देखने को मिलेगा। यानी इस बार अप्रैल में सूरज की तपिश से ज्यादा बादलों का डेरा रहेगा।
तापमान का खेल और किसानों को कड़ा संदेश
फिलहाल प्रदेश में दिन का तापमान सामान्य से नीचे बना हुआ है, जिससे गर्मी का अहसास कम है। हालांकि, हवाओं के बदलते रुख की वजह से रात के पारे में बढ़ोतरी दर्ज की जा सकती है। मौसम विभाग ने किसानों को दोटूक सलाह दी है कि वे मौसम की खिड़की मिलते ही गेहूं की कटाई का काम युद्ध स्तर पर निपटाएं।
जिन किसानों की सरसों की फसल कट चुकी है, वे उसे खुले आसमान के नीचे रखने की गलती न करें और तिरपाल या सुरक्षित गोदामों का इस्तेमाल करें। बेमौसम बारिश के कारण मंडी में भी नमी की समस्या बढ़ सकती है, जो किसानों की जेब पर सीधी चोट करेगी।