हरियाणा के 10 जिलों में तूफान और ओलावृष्टि की चेतावनी, किसानों की बढ़ी मुसीबत
Apr 03, 2026 10:18 AM
हरियाणा। चंडीगढ़ समेत समूचे हरियाणा में मौसम ने एक बार फिर यू-टर्न ले लिया है। उत्तर भारत के पर्वतीय क्षेत्रों में सक्रिय हुए नए पश्चिमी विक्षोभ ने मैदानी इलाकों की धड़कनें बढ़ा दी हैं। कल दिन भर निकली तेज धूप के बाद शाम होते-होते आसमान में काली घटाएं छा गईं और कई जिलों में धूल भरी आंधी के साथ बौछारें पड़ीं। मौसम विभाग ने आज राज्य के दक्षिणी और पश्चिमी हिस्सों में ओलावृष्टि को लेकर गंभीर चेतावनी जारी की है। इस बेमौसम बदलाव ने उन किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं, जिनकी फसलें पककर तैयार खड़ी हैं।
कहीं ऑरेंज तो कहीं येलो अलर्ट: इन जिलों में दिखेगा ज्यादा असर
मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, आज हरियाणा के अलग-अलग हिस्सों में मौसम के अलग तेवर देखने को मिलेंगे। अंबाला, पंचकूला, यमुनानगर, करनाल और कुरुक्षेत्र जैसे उत्तरी जिलों के लिए 'ऑरेंज अलर्ट' जारी किया गया है, यानी यहां तेज बारिश और गरज-चमक की संभावना अधिक है। वहीं, हिसार, फतेहाबाद, सिरसा, भिवानी और महेंद्रगढ़ में आंधी के साथ ओले गिर सकते हैं। रोहतक, झज्जर, सोनीपत और पानीपत के इलाकों में भी हल्की से मध्यम बारिश होने के आसार हैं। इस मौसमी उठापटक के चलते तापमान में भी गिरावट दर्ज की जा रही है।
किसानों की बढ़ी मुसीबत, 100 गांवों में फसलें तबाह
पिछले दो दिनों में हुई ओलावृष्टि ने पहले ही हरियाणा के कृषि क्षेत्र को भारी चोट पहुंचाई है। गेहूं, सरसों और चने की लहलहाती फसलें खेतों में बिछ गई हैं। खासकर हिसार और सिरसा बेल्ट में आंधी ने ज्यादा नुकसान किया है। मौसम विशेषज्ञ डॉ. चंद्रमोहन का कहना है कि अप्रैल के पहले सप्ताह में राहत की उम्मीद कम ही है। एक के बाद एक आ रहे पश्चिमी विक्षोभ के कारण 3 अप्रैल को भी तेज हवाएं चलेंगी। इसके बाद 7 और 8 अप्रैल को जब पहाड़ों पर बर्फबारी होगी, तो मैदानी इलाकों की हवाओं में फिर से बदलाव और नमी देखने को मिलेगी।
बचाव के लिए विशेष एडवायजरी जारी
बिगड़ते हालात को देखते हुए प्रशासन और कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सतर्क रहने की सलाह दी है। मंडियों में रखे अनाज को बचाने के लिए तिरपाल और अन्य सुरक्षा पुख्ता करने को कहा गया है। आमजन से भी अपील की गई है कि आंधी और बिजली कड़कने के दौरान ऊंचे पेड़ों, बिजली के खंभों या कच्चे छप्परों के नीचे शरण न लें। बेमौसम की यह मार न केवल फसलों को बर्बाद कर रही है, बल्कि कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को भी बड़े नुकसान की ओर धकेल रही है।