हरियाणा में मौसम का तांडव: 50KM की रफ्तार से चलेंगी हवाएं, ओलावृष्टि का ऑरेंज अलर्ट
Mar 30, 2026 10:19 AM
हरियाणा। चंडीगढ़ और आसपास के मैदानी इलाकों में कुदरत के बदलते मिजाज ने एक बार फिर धड़कनें बढ़ा दी हैं। हरियाणा के ऊपर सक्रिय हुई नई पश्चिमी मौसम प्रणाली (Western Disturbance) के कारण राज्य के अधिकांश हिस्सों में धूप-छांव का खेल खत्म होकर अब संकट के बादल मंडराने लगे हैं। मौसम विभाग की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, आज और कल प्रदेश के उत्तरी और दक्षिणी जिलों में कुदरत का रौद्र रूप देखने को मिल सकता है। खासकर जीटी रोड बेल्ट और एनसीआर से सटे जिलों में प्रशासन को सतर्क रहने की सलाह दी गई है क्योंकि 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली हवाएं भारी तबाही मचा सकती हैं।
इन जिलों में बरसेगी आफत, गिरेंगे ओले
मौसम विज्ञानियों ने चेतावनी दी है कि पंचकूला, अंबाला, यमुनानगर और कुरुक्षेत्र में हल्की से मध्यम दर्जे की बारिश के साथ तेज गर्जना होगी। वहीं, दक्षिण हरियाणा के महेंद्रगढ़, रेवाड़ी, गुरुग्राम, फरीदाबाद और पलवल जैसे जिलों में स्थिति अधिक संवेदनशील बनी हुई है। यहां धूल भरी आंधी के साथ ओलावृष्टि (Hailstorm) की प्रबल संभावना है। मौसम विशेषज्ञ डॉ. चंद्रमोहन के मुताबिक, 31 मार्च तक यह सिस्टम पूरी तरह सक्रिय रहेगा, जिससे बिजली गिरने की घटनाएं भी सामने आ सकती हैं। इसके बाद 2 अप्रैल को पहाड़ों पर होने वाली बर्फबारी का सीधा असर 5 अप्रैल तक मैदानी इलाकों में दिखेगा।
अन्नदाता की बढ़ी चिंता: गेहूं और सरसों पर मंडराया खतरा
इस बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने हरियाणा के किसानों की रातों की नींद उड़ा दी है। यह वह समय है जब खेतों में गेहूं की सुनहरी फसल पककर पूरी तरह तैयार खड़ी है और मंडियों में सरसों की आवक चरम पर है। अगर तेज हवाओं के साथ बारिश होती है, तो खड़ी फसल जमीन पर बिछ जाएगी, जिससे दानों की गुणवत्ता और पैदावार दोनों प्रभावित होंगे। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को मशविरा दिया है कि वे कटी हुई फसल को सुरक्षित स्थानों पर ढककर रखें और सिंचाई व कीटनाशकों का छिड़काव फिलहाल रोक दें।
अप्रैल के पहले हफ्ते में भी नहीं मिलेगी राहत
मार्च के जाते-जाते शुरू हुआ यह सिलसिला अप्रैल के पहले सप्ताह तक जारी रहने वाला है। 2 अप्रैल से हिमालयी क्षेत्रों में एक और शक्तिशाली विक्षोभ दस्तक दे रहा है। इसका असर 3 से 5 अप्रैल के बीच हरियाणा और दिल्ली-एनसीआर में नई हलचल पैदा करेगा। साफ है कि अगले एक हफ्ते तक तापमान में उतार-चढ़ाव बना रहेगा और लोगों को उमस भरी गर्मी के बजाय ठंडी हवाओं और नमी का सामना करना पड़ेगा।