HBSE का बड़ा फैसला: 10वीं विज्ञान विषय की परीक्षा अब 80 अंकों की होगी, बदला पूरा पैटर्न
May 01, 2026 2:00 PM
भिवानी। भिवानी स्थित हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड ने माध्यमिक स्तर की शिक्षा व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण सुधारात्मक कदम उठाया है। बोर्ड द्वारा जारी नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, कक्षा नौवीं और दसवीं के विज्ञान विषय के परीक्षा पैटर्न को पूरी तरह बदल दिया गया है। अब तक विज्ञान विषय में छात्रों को प्रैक्टिकल और आंतरिक मूल्यांकन के जरिए काफी राहत मिल जाती थी, लेकिन अब बोर्ड ने लिखित परीक्षा के महत्व को बढ़ा दिया है। नए सत्र 2026-27 से छात्रों को 80 अंकों का लिखित पेपर देना होगा। इससे पहले यह पेपर कम अंकों का होता था और प्रैक्टिकल का हिस्सा काफी बड़ा था।
एकरूपता की ओर बढ़ते कदम: अन्य विषयों जैसा होगा पैटर्न
शिक्षा विशेषज्ञों की मानें तो बोर्ड का यह फैसला एक लंबे समय से अपेक्षित बदलाव था। पहले विज्ञान विषय का अंक वितरण अन्य मुख्य विषयों जैसे हिंदी, अंग्रेजी और गणित से अलग था, जिसके चलते अक्सर छात्रों के कुल प्रतिशत में असंतुलन देखने को मिलता था। अब विज्ञान को भी 80 (थ्योरी) + 10 (प्रैक्टिकल) + 10 (इंटरनल) के फॉर्मूले पर ले आया गया है। इस बदलाव का सीधा असर प्रदेश के लाखों छात्र-छात्राओं पर पड़ेगा, जिन्हें अब साल भर अपनी किताबों और कक्षा की पढ़ाई पर ज्यादा ध्यान देना होगा।
रट्टा मारने की प्रवृत्ति पर लगेगी लगाम
बोर्ड के इस निर्णय के पीछे एक स्पष्ट सोच यह भी है कि विद्यार्थी केवल प्रैक्टिकल के अंकों के सहारे पास होने की जुगत न भिड़ाएं। आंतरिक मूल्यांकन और प्रयोगात्मक परीक्षा को 10-10 अंकों तक सीमित करने का मतलब है कि अब छात्र की वास्तविक योग्यता का आकलन बोर्ड की मुख्य परीक्षा के माध्यम से होगा। हालांकि, पास होने के नियमों में बोर्ड ने लचीलापन बरकरार रखा है। छात्रों को पास घोषित होने के लिए लिखित परीक्षा, प्रैक्टिकल और आंतरिक मूल्यांकन के कुल योग का 33 प्रतिशत हासिल करना होगा।
शिक्षकों और छात्रों के लिए नई चुनौती
बोर्ड ने इस बदलाव के साथ ही अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर संशोधित पाठ्यक्रम (Syllabus) और प्रश्न पत्र का नया डिजाइन भी अपलोड कर दिया है। स्कूल प्रभारियों और शिक्षकों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे नए सत्र की शुरुआत से ही विद्यार्थियों को इस बदली हुई प्रणाली के अनुसार तैयार करें। चरखी दादरी सहित पूरे प्रदेश के शिक्षा अधिकारियों ने स्कूलों को इस संबंध में जागरूक करना शुरू कर दिया है। अब देखना यह होगा कि इस बदलाव के बाद आगामी बोर्ड परीक्षाओं के परिणामों पर क्या असर पड़ता है।