रोहतक के दो गांवों में 'खौफ' का चुनाव: मौत के डर से पंच बनने को कोई तैयार नहीं, सालों से खाली हैं सीटें
May 01, 2026 4:57 PM
रोहतक। रोहतक जिले के गांव सुंदरपुर और इस्माइला 9बी इन दिनों किसी राजनीतिक हलचल की वजह से नहीं, बल्कि एक अजीबोगरीब दहशत के कारण चर्चा में हैं। जब प्रदेश के अन्य हिस्सों में लोग पंचायत चुनाव और उपचुनावों के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं, तब इन दो गांवों के दो विशेष वार्डों में सन्नाटा पसरा हुआ है। वजह कोई राजनीतिक विरोध नहीं, बल्कि एक गहरा अंधविश्वास है। ग्रामीणों के मन में यह बात घर कर गई है कि इन सीटों पर पंच का पद संभालना अपनी जान जोखिम में डालने जैसा है।
सुंदरपुर में 10 साल से 'खाली' है पंच की कुर्सी
हैरानी की बात यह है कि सुंदरपुर गांव के वार्ड नंबर 1 में पिछले एक दशक से लोकतंत्र का पहिया थमा हुआ है। ग्रामीणों का दावा है कि पूर्व में जो लोग यहां से पंच बने, उनके साथ कोई न कोई अनहोनी हुई या उनकी असमय मृत्यु हो गई। इसी तरह के हालात इस्माइला 9बी के वार्ड नंबर 13 में भी बने हुए हैं, जहां पिछले 8 सालों से कोई भी व्यक्ति चुनाव लड़ने के लिए आगे नहीं आया है। गांव की चौपालों पर चर्चा है कि इन पदों पर बैठना 'अशुभ' है, और इसी खौफ ने ग्रामीणों के हाथ बांध दिए हैं।
प्रशासन की चुनौती: अंधविश्वास बनाम जागरूकता
इस अजीबोगरीब स्थिति ने जिला प्रशासन और पंचायत विभाग के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। संवैधानिक प्रक्रिया का हिस्सा होने के बावजूद, लोगों का स्वेच्छा से पीछे हट जाना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती है। जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी (DDPO) ने इस मामले पर संज्ञान लेते हुए कहा है कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि आज के दौर में भी ऐसी भ्रांतियां समाज पर हावी हैं। विभाग ने अब निर्णय लिया है कि इन गांवों में विशेष टीमों को भेजकर ग्रामीणों की काउंसलिंग की जाएगी।
तर्क और विज्ञान से दूर भागते ग्रामीण
अधिकारियों का मानना है कि मौतों के पीछे कोई भी वैज्ञानिक या तार्किक कारण हो सकता है, लेकिन उसे पद से जोड़कर देखना महज एक भ्रम है। प्रशासन अब गांव के प्रबुद्ध लोगों और युवाओं के साथ मिलकर जागरूकता अभियान चलाएगा ताकि इन वार्डों में भी पंचायती राज व्यवस्था को बहाल किया जा सके। फिलहाल, सुंदरपुर और इस्माइला 9बी के ये वार्ड हरियाणा की सियासत में 'अंधविश्वास के टापू' बनकर रह गए हैं, जहां चुनाव लड़ने की हिम्मत जुटाना किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं माना जा रहा।