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झज्जर के बादसा में अनोखा चुनाव: सरपंच की एक कुर्सी और तीन सगे भाई, कौन मारेगा बाजी

May 01, 2026 4:19 PM

झज्जर। झज्जर के गांव बादसा की गलियों में इन दिनों चुनावी शोर तो है, लेकिन इस शोर में पारिवारिक रिश्तों की डोर भी उलझती नजर आ रही है। पूर्व सरपंच स्वर्गीय ज्ञानचंद की विरासत पर कब्जे को लेकर उनके तीनों बेटों ने नामांकन दाखिल कर इस मुकाबले को त्रिकोणीय और बेहद दिलचस्प बना दिया है। 45 वर्षीय दीपक, 43 वर्षीय रमेश और 40 वर्षीय मनोज के बीच छिड़ी इस 'जंग' ने ग्रामीणों को भी हैरत में डाल दिया है। गांव के बुजुर्गों का कहना है कि उन्होंने पहले कभी सगे भाइयों को इस तरह आमने-सामने नहीं देखा।

विकास और वकालत का दांव

सबसे बड़े बेटे दीपक का तर्क है कि उन्होंने पिता के कार्यकाल में उनके साथ रहकर जमीनी स्तर पर काम सीखा है। वे कहते हैं, "मैंने पिता के साथ कदम-से-कदम मिलाकर पंचायत के काम संभाले हैं, इसलिए मैं गांव की समस्याओं और उनके समाधान को बेहतर समझता हूं।" वहीं, दूसरे नंबर के भाई रमेश, जो गुरुग्राम में वकालत करते हैं, अपनी शिक्षा को हथियार बना रहे हैं। रमेश का मानना है कि एक वकील और शिक्षित व्यक्ति ही कानूनी पेचीदगियों को समझकर गांव का चहुंमुखी विकास कर सकता है। उनके मुताबिक, गांव को अब एक नए और आधुनिक नजरिए की जरूरत है।

विरासत बनाम बुजुर्गों का फैसला

सबसे छोटे भाई मनोज भी पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। मनोज का दावा है कि पिता का उनके प्रति विशेष लगाव था और वे उनके कामकाज के तरीकों से पूरी तरह वाकिफ हैं। हालांकि, भाइयों के बीच इस टकराव ने परिवार के बड़े-बुजुर्गों की चिंता बढ़ा दी है। मनोज ने दबे स्वर में स्वीकार किया कि परिवार और गांव के वरिष्ठ लोग अब भी बीच का रास्ता निकालने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा, "बुजुर्ग जो भी फैसला लेंगे, मैं उसका आदर करूंगा, लेकिन फिलहाल मेरा ध्यान चुनाव पर है।"

असमंजस में ग्रामीण: किसे दें समर्थन?

बादसा गांव के मतदाताओं के लिए भी यह स्थिति किसी धर्मसंकट से कम नहीं है। कल तक जो भाई अपने पिता ज्ञानचंद के लिए एक साथ होकर वोट मांगते थे, आज वे अलग-अलग टोलियां बनाकर ग्रामीणों के दरवाजे पर दस्तक दे रहे हैं। गांव की गलियों में सीवरेज, पक्की सड़कें और पीने के पानी जैसे मुद्दे तो हैं, लेकिन इस बार मतदाता यह देख रहे हैं कि पिता की असली विरासत—यानी गांव की सेवा—का जुनून किस भाई में सबसे ज्यादा है। फिलहाल, इस 'भाई बनाम भाई' की जंग ने बादसा के उपचुनाव को प्रदेश की सबसे हॉट सीट बना दिया है।

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