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हरियाणा में पेड़ काटने पर हाईकोर्ट की पूर्ण रोक: बिना कोर्ट की इजाजत अब नहीं चलेगी कुल्हाड़ी

Apr 02, 2026 10:15 AM

हरियाणा। चंडीगढ़ से लेकर गुरुग्राम और पंचकूला से लेकर सिरसा तक, अब पूरे हरियाणा में पेड़ काटने से पहले अधिकारियों और ठेकेदारों को सौ बार सोचना होगा। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक आदेश जारी करते हुए पूरे राज्य में पेड़ों की कटाई पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। बुधवार को चीफ जस्टिस शील नागू की पीठ ने स्पष्ट कर दिया कि अब पूरे प्रदेश में कहीं भी पेड़ काटने के लिए अदालत की पूर्व अनुमति अनिवार्य होगी। कोर्ट की यह सख्ती केवल किसी एक प्रोजेक्ट के लिए नहीं, बल्कि पूरे हरियाणा के पर्यावरण को बचाने की एक बड़ी कवायद मानी जा रही है।

जीरकपुर-पंचकूला हाईवे प्रोजेक्ट पर संकट के बादल

यह पूरा मामला जीरकपुर-पंचकूला कंट्रोल्ड हाईवे परियोजना के खिलाफ दायर एक जनहित याचिका से शुरू हुआ। इस प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए सरकार की योजना लगभग 17.57 हेक्टेयर वन भूमि को डायवर्ट करने और करीब 5,000 पुराने पेड़ों को बलि चढ़ाने की थी। याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि पंचकूला गोल्फ कोर्स, सेक्टर-1ए की ग्रीन बेल्ट और घग्गर नदी के किनारों पर स्थित ये पेड़ 'ट्राइसिटी' के फेफड़ों की तरह काम करते हैं। अगर इन्हें काट दिया गया, तो पंचकूला और चंडीगढ़ की हवा की गुणवत्ता और जैव विविधता को अपूरणीय क्षति पहुंचेगी।

"देश में सबसे कम वन क्षेत्र": कोर्ट ने दिखाई सरकार को आईना

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने हरियाणा के वन विभाग और सरकार को आड़े हाथों लिया। अदालत ने बेहद तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि हरियाणा में वन क्षेत्र (Forest Cover) का ग्राफ देश में सबसे न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया है। कोर्ट ने इसे एक गंभीर पर्यावरणीय संकट करार दिया और कहा कि विकास के नाम पर प्रकृति के साथ खिलवाड़ को अब मूकदर्शक बनकर नहीं देखा जा सकता। इस आदेश के बाद अब राज्य के सभी बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स, जिनमें पेड़ों की कटाई शामिल थी, फिलहाल अधर में लटक गए हैं।

सरकार और विभागों को कड़ा संदेश

अदालत के इस रुख ने साफ कर दिया है कि पर्यावरण संरक्षण के मोर्चे पर अब किसी भी तरह की प्रशासनिक लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। जानकारों का मानना है कि यह फैसला न केवल ट्राइसिटी के हरित क्षेत्र को बचाएगा, बल्कि भविष्य की परियोजनाओं के लिए भी एक मिसाल बनेगा। कोर्ट ने संबंधित विभागों को निर्देश दिया है कि वे पर्यावरण संतुलन और विकास के बीच के तालमेल पर अपनी विस्तृत रिपोर्ट पेश करें। जब तक कोर्ट संतुष्ट नहीं होता, हरियाणा की हरियाली पर कुल्हाड़ी नहीं चलेगी।

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