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टोहाना बिजली निगम का बड़ा एक्शन: 675 डिफॉल्टरों की संपत्ति होगी कुर्क, 15 करोड़ की वसूली का प्लान

Mar 29, 2026 3:16 PM

हरियाणा। टोहाना में बिजली बिलों की अदायगी न करने वाले उपभोक्ताओं के लिए अब मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (DHBVN) ने लंबे समय से बिल दबाकर बैठे 'महाडिफॉल्टरों' के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई शुरू कर दी है। विभाग ने साफ कर दिया है कि अब केवल बिजली कनेक्शन काटना काफी नहीं है, बल्कि बकाया राशि की पाई-पाई वसूलने के लिए उपभोक्ताओं की अचल संपत्ति को कुर्क किया जाएगा। निगम ने ऐसे 675 लोगों को चिन्हित किया है, जो बार-बार नोटिस देने के बावजूद टस से मस नहीं हुए। इन पर विभाग का कुल 15 करोड़ 75 लाख रुपये बकाया है।

पहले चरण में 7 'बड़े नाम' निशाने पर

बिजली निगम के अधिकारियों के मुताबिक, कुर्की की प्रक्रिया को दो चरणों में बांटा गया है। अगले सप्ताह तक पहले 7 बड़े डिफॉल्टरों की सूची कार्यकारी अभियंता (XEN) के माध्यम से राजस्व विभाग को भेज दी जाएगी। इन नामों में न्यू मेडिकल इंक्लेव की सीमा रानी शामिल हैं, जिन पर अकेले 12.22 लाख रुपये का बिल बकाया है। इसके अलावा रितु रानी (1.59 लाख), पार्वती देवी (1.60 लाख), जोगिंदर सिंह (1.38 लाख) और प्रेमचंद (1.81 लाख) जैसे उपभोक्ताओं की फाइलें भी कुर्की के लिए तैयार हैं। रतिया रोड, भुना रोड और कमालवाला रोड जैसे इलाकों के ये उपभोक्ता अब सीधे तौर पर प्रशासन की रडार पर हैं।

कॉलोनाइजरों पर भी नकेल, लैंडमार्क गार्डन सिटी को नोटिस

यह कार्रवाई केवल व्यक्तिगत उपभोक्ताओं तक सीमित नहीं है। व्यावसायिक और रियल एस्टेट सेक्टर से जुड़े बड़े बकायेदारों को भी लपेटा जा रहा है। लैंडमार्क गार्डन सिटी (उदय डेवलपर) को भी करीब 2 लाख रुपये की रिकवरी के लिए कड़ा नोटिस थमाया गया है। निगम का कहना है कि व्यावसायिक उपभोक्ताओं से वसूली के लिए कोई रियायत नहीं बरती जाएगी। एसडीओ संजय सिंगला और सीए देवीलाल ने स्पष्ट किया कि कानूनी प्रावधानों के तहत अब इन संपत्तियों की नीलामी कर सरकारी खजाने की भरपाई की जाएगी।

राजस्व विभाग के पाले में गेंद: अब नहीं चलेगी बहानेबाजी

बिजली निगम की इस सख्त रुख के पीछे का कारण बढ़ता हुआ घाटा और रिकवरी का दबाव है। विभाग ने उन सभी 675 उपभोक्ताओं को पहले ही तीन-तीन बार चेतावनी नोटिस जारी कर दिए थे। अब यह मामला राजस्व विभाग के पास जाएगा, जहाँ तहसीलदार स्तर पर इन संपत्तियों को जब्त करने की प्रक्रिया शुरू होगी। इस कार्रवाई के बाद डिफॉल्टर न तो अपनी जमीन बेच पाएंगे और न ही उस पर किसी तरह का कर्ज ले सकेंगे। विभाग की इस सख्ती ने शहर के अन्य बकायेदारों में भी खौफ पैदा कर दिया है।

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