बरवाला मंडी में मंत्रियों का एक्शन: हैफेड कर्मी सस्पेंड, कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा ने दिए सख्त निर्देश
Apr 13, 2026 4:59 PM
हरियाणा। हरियाणा की अनाज मंडियों में इन दिनों गेहूं की आवक चरम पर है, और इसी बीच सरकार ने खरीद व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त करने के लिए जमीनी स्तर पर मोर्चा संभाल लिया है। रविवार को कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा और लोक निर्माण व जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी मंत्री रणबीर गंगवा अचानक बरवाला अनाज मंडी पहुंचे। मंत्रियों के इस दौरे से मंडी प्रशासन में हड़कंप मच गया। निरीक्षण के दौरान जब किसानों और व्यापारियों ने हैफेड के एक कर्मचारी पर बेवजह परेशान करने और काम में अड़ंगा डालने के आरोप लगाए, तो मंत्री रणबीर गंगवा ने तुरंत कार्रवाई की सिफारिश की। इस पर कृषि मंत्री राणा ने जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए उक्त कर्मचारी को निलंबित करने के आदेश मौके पर ही दे दिए।
आंकड़ों का मिलान और उठान पर जोर
मंत्रियों ने मंडी में मौजूद आवक और अब तक हुए उठान के आंकड़ों की बारीकी से जांच की। अधिकारियों के साथ बैठक करते हुए उन्होंने दो-टूक कहा कि कागजी कार्रवाई के चक्कर में उठान की गति धीमी नहीं पड़नी चाहिए। फसल का उठान जितना तेज होगा, किसानों को मंडी में अपनी ट्रॉली खाली करने में उतनी ही आसानी होगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि लेबर और ट्रांसपोर्ट की व्यवस्था को 24 घंटे मॉनिटर किया जाए।
बायोमेट्रिक से घबराने की जरूरत नहीं, ओटीपी का भी विकल्प
फसल बिक्री के दौरान आने वाली तकनीकी दिक्कतों, खासकर बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन पर कृषि मंत्री ने किसानों को आश्वस्त किया। उन्होंने कहा कि सरकार ने नियमों में लचीलापन लाया है। अब किसान अपनी फसल बेचने के लिए अपने परिवार या विश्वसनीय 3 व्यक्तियों के नाम दर्ज करवा सकता है, जिनमें से कोई भी एक व्यक्ति मंडी आकर प्रक्रिया पूरी कर सकेगा। यदि अंगूठे के निशान (बायोमेट्रिक) में दिक्कत आती है, तो ओटीपी (OTP) के जरिए भी वेरिफिकेशन किया जा सकता है।
पोर्टल से आई पारदर्शिता: राणा
कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा ने सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा कि 'मेरी फसल-मेरा ब्यौरा' और 'ई-खरीद' प्रणाली ने बिचौलिया प्रथा को खत्म कर दिया है। उन्होंने कहा कि भावांतर भरपाई योजना और किसान सम्मान निधि जैसी योजनाओं का सीधा लाभ आज किसानों के बैंक खातों में पहुंच रहा है। स्थानीय किसानों की फसल को प्राथमिकता के आधार पर खरीदना सरकार की प्रतिबद्धता है। मंडियों में नई व्यवस्थाएं भले ही शुरुआत में चुनौतीपूर्ण लगें, लेकिन लंबे समय में यह प्रदेश के अन्नदाता के हक में ही साबित होंगी।