हिसार पुलिस पर भारी पड़ा दुष्यंत चौटाला से पंगा: हत्या का आरोपी निकला सीआईए इंस्पेक्टर पवन
Apr 20, 2026 10:46 AM
हिसार। हरियाणा की राजनीति का केंद्र रहे हिसार में इन दिनों पुलिस और जननायक जनता पार्टी (जजपा) के बीच आर-पार की जंग छिड़ी हुई है। गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय में हुए बवाल के बाद पूर्व डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला ने जिस सीआईए इंस्पेक्टर पवन सिंह पर अभद्रता और गन तानने के आरोप लगाए थे, वह अब खुद अपनी पुरानी 'फाइलों' के कारण बैकफुट पर हैं। दरअसल, फतेहाबाद की एक महिला सुमन बिश्नोई ने वीडियो जारी कर सनसनी फैला दी है। सुमन का आरोप है कि इंस्पेक्टर पवन वही शख्स है जिसने उसके पति हरपाल सिंह की पुलिस कस्टडी में कथित तौर पर हत्या की थी। महिला का कहना है कि हत्या (धारा 302) का आरोपी होने के बावजूद इंस्पेक्टर वर्दी में रसूख दिखा रहा है, जबकि उसका परिवार ढाई साल से न्याय के लिए भटक रहा है।
यूनिवर्सिटी से शुरू हुआ बवाल अब कोर्ट और बार तक पहुंचा
विवाद की शुरुआत 16 अप्रैल को हुई जब दिग्विजय चौटाला अपने समर्थकों के साथ जीजेयू के वीसी कार्यालय पहुंचे थे। पुलिस का दावा है कि प्रदर्शनकारियों ने गेट तोड़ने की कोशिश की और अधिकारियों से बदतमीजी की, वहीं जजपा का कहना है कि पुलिस ने सत्ता के दबाव में बर्बरता दिखाई। इस मामले में पुलिस ने आनन-फानन में दिग्विजय चौटाला समेत 8 पदाधिकारियों पर केस दर्ज कर 6 को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस की इस कार्रवाई ने अब वकीलों को भी नाराज कर दिया है। हिसार बार एसोसिएशन ने पुलिस पर आरोपियों के परिवारों के साथ दुर्व्यवहार का आरोप लगाते हुए जनरल हाउस मीटिंग बुलाई है, जिससे यह कानूनी लड़ाई और बड़ी होने के आसार हैं।
दुष्यंत के काफिले पर रैश ड्राइविंग का आरोप, पुलिस की अपनी सफाई
हिसार पुलिस अब बचाव की मुद्रा में नजर आ रही है। डीएसपी कवलजीत के नेतृत्व में पुलिस ने बयान जारी कर दुष्यंत चौटाला के काफिले पर ही गंभीर आरोप मढ़ दिए हैं। पुलिस का कहना है कि गिरफ्तारी देने पहुंचे दुष्यंत के समर्थकों ने गाड़ी को बेहद खतरनाक तरीके से चलाया और पुलिस कर्मचारियों को धक्का दिया। साथ ही, पूर्व डिप्टी सीएम की 'वाई प्लस' सुरक्षा में निजी पायलट गाड़ी चलाने को नियमों के विरुद्ध बताया गया है। हालांकि, कस्टडी मर्डर के आरोपी इंस्पेक्टर को ड्यूटी पर तैनात रखने के सवाल पर पुलिस की चुप्पी कई गहरे सवाल खड़े कर रही है। फिलहाल, पूरे मामले की फाइल एसआईटी को सौंप दी गई है, जो इस सियासी और कानूनी गुत्थी को सुलझाने की कोशिश करेगी।