हिसार पुलिस का बड़ा दावा: दुष्यंत चौटाला की सुरक्षा में 'प्राइवेट पायलट' गैरकानूनी, सीसीटीवी में दिखी लापरवाही
Apr 19, 2026 4:17 PM
हिसार। पूर्व डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला और हिसार पुलिस के बीच छिड़ी 'जुबानी जंग' अब तकनीकी साक्ष्यों और नियमों की पेंचदगियों में उलझ गई है। सीआईए इंस्पेक्टर के साथ हुए हाई-वोल्टेज ड्रामे के बाद अब हिसार पुलिस ने अपना आधिकारिक पक्ष रखते हुए मामले को नया मोड़ दे दिया है। पुलिस का सीधा आरोप है कि दुष्यंत चौटाला के काफिले में शामिल 'प्राइवेट पायलट' गाड़ी न केवल नियमों के खिलाफ थी, बल्कि उसका चालक सड़क पर अन्य वाहनों के लिए भी खतरा पैदा कर रहा था।
पायलट गाड़ी का 'टशन' या नियमों की अनदेखी?
मामले की कमान संभाल रहे एसआईटी प्रमुख और डीएसपी कमलजीत ने तथ्यों को सामने रखते हुए बताया कि दुष्यंत चौटाला की 'वाई श्रेणी' की सुरक्षा में नियमों के तहत पायलट गाड़ी नहीं दी जाती। बावजूद इसके, उनके काफिले में एक निजी गाड़ी को 'पायलट' के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा था। डीएसपी ने कहा, "सुरक्षा नियमों की यह सीधी अवहेलना है। ऊपर से इस गाड़ी का चालक जिस तरह से ड्राइविंग कर रहा था, वह किसी बड़े हादसे को न्योता देने जैसा था।"
सीसीटीवी फुटेज में कैद हुआ 'ओवरटेक' का खेल
पुलिस ने सब्जी मंडी पुल के पास की एक नई सीसीटीवी फुटेज का हवाला देते हुए बताया कि निजी पायलट गाड़ी ने दो-तीन बार सीआईए की सरकारी गाड़ी को खतरनाक तरीके से काटने (ओवरटेक करने) की कोशिश की। इसी असुरक्षित ड्राइविंग को देखते हुए सीआईए इंस्पेक्टर पवन ने गाड़ी रुकवाकर चालक को टोकना चाहा। पुलिस का पक्ष है कि यह कोई 'घेराबंदी' नहीं, बल्कि सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करने का एक सामान्य प्रयास था। आरोप है कि इसी दौरान दिग्विजय चौटाला ने मौके पर तैनात सब-इंस्पेक्टर राजकुमार के साथ कथित तौर पर अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया।
विरोध प्रदर्शन से शुरू हुआ था बवाल
याद दिला दें कि यह पूरा विवाद उस समय शुरू हुआ जब दुष्यंत चौटाला अपने भाई दिग्विजय और समर्थकों के साथ गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय (GJU) कांड के विरोध में हिसार पहुंचे थे। सिटी थाने में गिरफ्तारी की मांग को लेकर हुए हंगामे के बाद जब काफिला एसपी कार्यालय की ओर बढ़ा, तब सब्जी मंडी पुल के पास पुलिस और चौटाला समर्थकों के बीच तीखी बहस हुई थी।
राजनीतिक रंग ले रहा है मामला
चौटाला परिवार ने जहां पुलिस पर हथियार दिखाने और रास्ता रोकने के गंभीर आरोप लगाए हैं, वहीं पुलिस अब सीसीटीवी और नियमों की ढाल बनाकर खुद का बचाव कर रही है। अब सवाल यह उठता है कि क्या प्राइवेट पायलट का उपयोग वाकई सुरक्षा चूक थी या पुलिस की यह दलील केवल बचाव का एक रास्ता है? फिलहाल, एसआईटी की रिपोर्ट ही इस मामले में दूध का दूध और पानी का पानी करेगी।