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जम्मू-कश्मीर में निर्वाचित सरकार के पास जो शक्तियां होनी चाहिए, वे नहीं हैं: फारूक अब्दुल्ला

Mar 12, 2026 5:17 PM

जम्मू: नेशनल कांफ्रेंस (नेकां) के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर के राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग दोहराते हुए बृहस्पतिवार को कहा कि चुनी हुई सरकार के पास वे अधिकार नहीं हैं, जो उसके पास होने चाहिए।

अब्दुल्ला पर हुए हमले को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा जम्मू-कश्मीर को राज्य के दर्जा के अभाव के साथ जोड़े जाने के बारे में पूछे जाने पर नेकां अध्यक्ष ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में चुनाव इस आश्वासन के साथ हुए थे कि पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल किया जाएगा।

उन्होंने यहां पत्रकारों से कहा कि सबसे बड़ी समस्या यह है कि चुनी हुई सरकार तो है, लेकिन उसके पास जो शक्तियां होनी चाहिए, वे नहीं हैं। चुनाव इस वादे के साथ कराए गए थे कि राज्य का दर्जा बहाल किया जाएगा और लोगों की समस्याओं का समाधान किया जाएगा। कई साल बीत गए हैं – राज्य का वह दर्जा कहां है?

अब्दुल्ला ने कहा कि राज्य का दर्जा बहाल करने का आश्वासन संसद में और उच्चतम न्यायालय के समक्ष दिया गया था। जब उनसे राज्य के दर्जा के अभाव में जम्मू कश्मीर में अपराध बढ़ने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि देश में हर जगह अपराध है। गरीबी बढ़ रही है और विशेषकर ईरान से जुड़े युद्ध के कारण वैश्विक स्थिति हम पर भी असर डालेगी।

उन्होंने कहा कि मध्य वर्ग को बढ़ते दामों के चलते सबसे बड़ी कठिनाई का सामना करना होगा। अब्दुल्ला ने उन पर हुए हमले को उनकी पार्टी द्वारा साजिश का हिस्सा बताये जाने पर कहा कि ऐसे किसी भी दावे की जांच होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि अगर कोई साजिश है, तो वह निश्चित रूप से सामने आनी चाहिए। लेकिन मैं केंद्र सरकार और उपराज्यपाल से अनुरोध करता हूं कि जब वे बार-बार कहते हैं कि स्थिति पूरी तरह सुधर गई है, तो उन्हें यह जांच करनी चाहिए कि क्या वास्तव में हमारे लिए सम्मान के साथ घूमने-फिरने का माहौल इतना सुरक्षित हो गया है।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में मतभेद होना स्वाभाविक है । उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत की ताकत उसके धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक स्वरूप में निहित है। उन्होंने कहा कि हमारे विचार भले ही अलग-अलग हों, लेकिन भारत एक स्वतंत्र और धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है। हर किसी को अपनी बात कहने का अधिकार है। हम असहमत हो सकते हैं, लेकिन हमें मिलकर रहना है।

शीर्ष अदालत द्वारा अलगाववादी नेता शब्बीर शाह को जमानत दिए जाने पर अब्दुल्ला ने कहा कि लोगों को देश को बेहतर बनाने की दिशा में काम करना चाहिए।

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