हरियाणा में भ्रष्ट अफसरों की अब खैर नहीं, जेब से मोबाइल निकालें और सीधे ACB ऐप पर भेजें घूसखोरी का वीडियो
Jun 05, 2026 1:28 PM
हरियाणा में सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने वाले आम लोगों को अब रिश्वतखोर अधिकारियों के आगे लाचार नहीं होना पड़ेगा। राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) एक ऐसे अभेद्य डिजिटल हथियार को जमीन पर उतारने की तैयारी में है, जिससे भ्रष्ट मुलाजिमों के पसीने छूटने तय हैं। ब्यूरो जल्द ही एक ऐसा मोबाइल ऐप लॉन्च करने जा रहा है, जो सीधे तौर पर जनता को 'जासूस' की ताकत दे देगा। यानी अगर कोई अधिकारी या कर्मचारी काम के एवज में टेबल के नीचे से पैसे मांगता है, तो उसका वीडियो या फोटो बनाकर सीधे इस ऐप पर भेजा जा सकेगा।
पंचकूला मुख्यालय में ब्यूरो चीफ ए.एस. चावला का बड़ा खुलासा
इस अत्याधुनिक ऐप को लेकर पंचकूला स्थित एसीबी मुख्यालय में एक अहम प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया। ब्यूरो प्रमुख (डीजी) ए.एस. चावला ने बताया कि इस ऐप का पूरा इंटरफेस आम आदमी की सहूलियत को ध्यान में रखकर बेहद आसान और यूजर-फ्रेंडली बनाया जा रहा है। इस सिंगल प्लेटफॉर्म पर न केवल सबूत अपलोड करने की सुविधा होगी, बल्कि लोग सीधे हेल्पलाइन से जुड़ सकेंगे। यही नहीं, ऐप के जरिए शिकायतकर्ताओं को अपने ही जिले की एसीबी यूनिट में तैनात आला अफसरों के नाम और नंबर भी मिल जाएंगे, ताकि वे सीधे उनसे संपर्क साध सकें।
गोपनीयता की सौ फीसदी गारंटी, डरने की जरूरत नहीं
अक्सर देखा जाता है कि लोग अफसरों की दुश्मनी या अपनी सुरक्षा के डर से भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने से कतराते हैं। जनता के इसी डर को दूर करने के लिए ऐप में एक विशेष फीचर जोड़ा गया है। ब्यूरो चीफ के मुताबिक, शिकायतकर्ता अपनी पहचान पूरी तरह गुप्त (गोपनीय) रखकर भी भ्रष्ट तंत्र की सूचनाएं साझा कर सकता है। एसीबी को जैसे ही कोई वीडियो या इनपुट मिलेगा, मुख्यालय स्तर पर पहले उसकी तकनीकी जांच और सत्यापन किया जाएगा। मामला सही पाए जाने पर आरोपी अधिकारी को संभलने का मौका दिए बिना सीधे जेल की सलाखों के पीछे भेजा जाएगा।
5 महीने में 67 ट्रैप: एसीबी के आंकड़ों ने चौकाया
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ब्यूरो प्रमुख ने साल 2026 के पहले पांच महीनों का रिपोर्ट कार्ड भी पेश किया, जो यह साफ करता है कि सूबे में भ्रष्टाचार के खिलाफ किस रफ्तार से काम हो रहा है। इस अवधि में ब्यूरो ने कुल 83 आपराधिक मामले दर्ज किए हैं। इनमें से सबसे बड़ी कामयाबी 67 'ट्रैप ऑपरेशनों' के रूप में मिली, जहां रिश्वत की रकम लेते हुए अधिकारियों को रंगे हाथों दबोचा गया। गिरफ्त में आए आरोपियों में 8 ग्रुप-बी (राजपत्रित) अधिकारी, 51 ग्रुप-सी कर्मचारी और उनके लिए दलाली करने वाले 9 निजी व्यक्ति शामिल हैं। बड़ी बात यह भी है कि इस दौरान मजबूत पैरवी के दम पर कोर्ट से 18 मामलों में 20 दोषियों को सख्त सजा भी दिलाई जा चुकी है।