हरियाणा में रचा गया इतिहास: जींद-सोनीपत के बीच दौड़ी देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन, सफल रहा ट्रायल
Mar 28, 2026 4:46 PM
जींद। हरियाणा के रेल इतिहास में आज का दिन सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गया है। भारतीय रेलवे के महत्वाकांक्षी 'नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन' के तहत जींद से सोनीपत के बीच देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का परफॉर्मेंस ट्रायल सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। यह महज एक ट्रेन का परीक्षण नहीं था, बल्कि भारतीय रेल के डीजल मुक्त होने की दिशा में एक लंबी छलांग है। ट्रायल के दौरान जब यह नीली और सफेद रंग की हाईटेक ट्रेन पटरियों पर दौड़ी, तो इसकी रफ्तार और खामोशी ने विशेषज्ञों को भी हैरान कर दिया।
800 ग्राम गैस में 1 किलोमीटर: उत्साहजनक रहे नतीजे
रेलवे के तकनीकी विशेषज्ञों की देखरेख में हुए इस ट्रायल में ईंधन की खपत पर विशेष नजर रखी गई। आंकड़ों के मुताबिक, ट्रेन ने प्रति किलोमीटर औसतन 800 ग्राम हाइड्रोजन गैस का इस्तेमाल किया। रेलवे बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि शुरुआती दौर में यह आंकड़े काफी प्रभावशाली हैं और आने वाले समय में तकनीक के और परिपक्व होने पर इस खपत को कम किया जा सकता है। सबसे बड़ी बात यह है कि इस पूरी प्रक्रिया में कार्बन उत्सर्जन शून्य रहा।
साइलेंट किलर नहीं, 'साइलेंट हीलर': शोर से भी मिलेगी मुक्ति
डीजल इंजनों की गड़गड़ाहट और काले धुएं से परेशान रहने वाले यात्रियों के लिए यह ट्रेन किसी वरदान से कम नहीं है। हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक पर आधारित यह ट्रेन न केवल धुआं रहित है, बल्कि इसका शोर स्तर (Noise Level) भी नगण्य है। परीक्षण के दौरान ट्रेन के भीतर और बाहर ध्वनि प्रदूषण की जांच की गई, जिसमें यह सामान्य ट्रेनों के मुकाबले कहीं अधिक शांत पाई गई। इसमें लगे सुरक्षा टैंक और फ्यूल सेल की मजबूती को भी विभिन्न गति सीमाओं (Speed Limits) पर परखा गया।
प्रधानमंत्री के मिशन को मिली रफ्तार: कब शुरू होगा आम सफर?
यह प्रोजेक्ट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस सपने का हिस्सा है जिसमें भारत को दुनिया का 'ग्रीन हाइड्रोजन हब' बनाने का लक्ष्य रखा गया है। जींद-सोनीपत रूट को इस ऐतिहासिक शुरुआत के लिए इसलिए चुना गया क्योंकि यहाँ का ट्रैक और बुनियादी ढांचा इस तरह के प्रयोगों के लिए अनुकूल है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, ट्रायल के दौरान जुटाए गए डेटा का अब गहन विश्लेषण किया जाएगा। अगर सब कुछ योजना के मुताबिक रहा, तो साल 2026 के मध्य तक इस रूट पर हाइड्रोजन ट्रेन का नियमित संचालन शुरू हो सकता है, जिससे हरियाणा न केवल औद्योगिक बल्कि 'इको-फ्रेंडली' ट्रांसपोर्ट में भी देश का रोल मॉडल बनेगा।