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जींद में बड़ा हादसा: पिता के सामने नहर में डूबे दो सगे भाई, विसर्जन के दौरान उफनती लहरों ने छीना कलेजे का टुकड़ा

Mar 27, 2026 12:27 PM

जींद।  हरियाणा के जींद जिले के नरवाना में एक ऐसा मंजर सामने आया जिसने हर किसी की रूह कंपा दी। जहां पूरा देश अष्टमी और नवमी की खुशियों में डूबा था, वहीं प्रेम नगर कॉलोनी में रहने वाले एक परिवार के आंगन का चिराग बुझ गया। राजस्थान मूल के राजेश के दो बेटे, लक्की और महेंद्र, गुरुवार शाम को अपने पिता के साथ गुरथली रोड स्थित सिरसा ब्रांच नहर पर विसर्जन के लिए पहुंचे थे। किसी ने सोचा भी नहीं था कि श्रद्धा का यह सफर एक कभी न खत्म होने वाले इंतजार में बदल जाएगा।

छोटे भाई को बचाने की जिद ने ले ली दोनों की जान

प्रत्यक्षदर्शियों और पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, विसर्जन के दौरान 14 साल के लक्की का अचानक पैर फिसल गया और वह संतुलन खोकर उफनती नहर में जा गिरा। छोटे भाई को पानी की लहरों से जूझता देख 16 वर्षीय महेंद्र ने एक पल की भी देरी नहीं की और उसे बचाने के लिए मौत की परवाह किए बिना नहर में छलांग लगा दी। देखते ही देखते दोनों भाई तेज बहाव की चपेट में आ गए। किनारे पर खड़े पिता बेबस होकर चिल्लाते रहे और मदद की गुहार लगाते रहे, लेकिन जब तक पास के खेतों से लोग दौड़कर आए, दोनों भाई आंखों से ओझल हो चुके थे।

NDRF और गोताखोरों का सर्च ऑपरेशन, रात भर रही हलचल

हादसे की सूचना मिलते ही सदर थाना पुलिस दलबल के साथ मौके पर पहुंची। रात का अंधेरा और नहर का तेज बहाव रेस्क्यू ऑपरेशन में बड़ी बाधा बना। सदर थाना प्रभारी ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तुरंत रोहतक सुनारिया से NDRF की टीम को बुलवाया। स्थानीय गोताखोरों के साथ-साथ प्रशासन की टीमें टॉर्च और नावों की मदद से कई किलोमीटर दूर तक बच्चों की तलाश कर रही हैं। फिलहाल बच्चों का कोई सुराग नहीं मिल पाया है, जिससे परिजनों की उम्मीदें टूटती नजर आ रही हैं।

राजस्थान से आए परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

मृतक बच्चों का पिता राजेश मूल रूप से राजस्थान का रहने वाला है और पिछले कुछ समय से नरवाना की प्रेम नगर कॉलोनी में रहकर मजदूरी कर परिवार पाल रहा था। पड़ोसियों ने बताया कि दोनों बच्चे मिलनसार और पढ़ने में होनहार थे। राजेश बार-बार बेहोश हो रहे हैं और बस यही कह रहे हैं कि "मैं उन्हें नहर पर लेकर ही क्यों गया?" इस हृदयविदारक घटना ने प्रशासन को एक बार फिर चेताया है कि धार्मिक आयोजनों और विसर्जन के वक्त सुरक्षा के कड़े इंतजाम न होना किस कदर भारी पड़ सकता है।

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