Kaithal News: कैथल में किसानों का हल्ला बोल, 15 सितंबर से धान खरीद और KCC लिमिट 5 लाख करने की मांग को लेकर प्रदर्शन

कैथल में किसानों का 15 सितंबर से धान खरीद और KCC लिमिट 5 लाख करने की मांग को लेकर प्रदर्शन
Kaithal News: हरियाणा के कैथल में अपनी लंबित मांगों को लेकर किसानों का गुस्सा एक बार फिर सड़कों पर देखने को मिला। भारतीय किसान यूनियन (एकता सिद्धपुर) से जुड़े दर्जनों किसान सोमवार को लघु सचिवालय परिसर के पार्क में एकत्र हुए और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इसके बाद भाकियू एकता सिद्धपुर के स्टेट कन्वीनर होशियार गिल की अगुवाई में किसानों ने जोरदार प्रदर्शन करते हुए जिला प्रशासन के माध्यम से सरकार को अपना मांग पत्र सौंपा।
धान खरीद और केसीसी लिमिट पर सरकार को घेरा
प्रदर्शनकारी किसानों को संबोधित करते हुए स्टेट कन्वीनर होशियार गिल ने कहा कि आने वाले सीजन को देखते हुए धान की सरकारी खरीद 15 सितंबर से सुचारू रूप से शुरू की जानी चाहिए। इसके साथ ही इस बार खराब मौसम को देखते हुए धान में नमी (मॉइस्चर) की आधिकारिक छूट सीमा को 17 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत किया जाए ताकि मंडियों में किसानों को फसल बेचने में परेशानी न आए।
होशियार गिल ने केंद्रीय बजट घोषणाओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) की सीमा 3 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये करने का ऐलान किया था। लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी बैंक स्तर पर कोई आधिकारिक नोटिफिकेशन या गाइडलाइन जारी नहीं की गई है, जिससे किसानों को इस योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
मेरी फसल-मेरा ब्यौरा पोर्टल खोलने और गन्ने के दाम बढ़ाने की मांग
किसान नेताओं ने कहा कि सर्वर डाउन होने और तकनीकी खामियों की वजह से प्रदेश के हजारों किसान अपनी खरीफ फसलों का पंजीकरण ‘मेरी फसल-मेरा ब्यौरा’ पोर्टल पर कराने से चूक गए हैं। ऐसे में सरकार को तुरंत इस पोर्टल को दोबारा खोलना चाहिए। इसके अलावा किसानों ने गन्ने का सरकारी भाव 600 रुपये प्रति क्विंटल तय करने और इकबालपुर शुगर मिल में पिछले 9 वर्षों से अटका किसानों का बकाया भुगतान तुरंत ब्याज सहित दिलवाने की मांग उठाई।
खाद की किल्लत दूर करने और मुआवजे की गुहार
ज्ञापन में किसानों ने आगामी रबी फसलों की बुआई के लिए अभी से डीएपी (DAP) और यूरिया की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की। साथ ही हिसार, हांसी, जींद, फतेहाबाद और सिरसा जैसे सूखा प्रभावित जिलों को औपचारिक रूप से सूखाग्रस्त घोषित कर प्रभावित किसानों को प्रति एकड़ उचित मुआवजा देने, खेतों से गुजरने वाली हाईटेंशन बिजली लाइनों का वाजिब मुआवजा तय करने और पारदर्शी तरीके से जमीनों की मार्केट वैल्यू निर्धारित करने का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया।
किसान नेताओं ने दो टूक चेतावनी दी कि यदि सरकार ने समय रहते उनकी इन न्यायसंगत मांगों पर सकारात्मक फैसला नहीं लिया, तो राज्यभर का किसान एकजुट होकर आर-पार के बड़े आंदोलन के लिए मजबूर होगा।
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