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50 हजार की रिश्वत और जाली मुहरें! कैथल के स्कूल संचालक श्री ओम हुड्डा का फर्जीवाड़ा बेनकाब

May 09, 2026 11:33 AM

कैथल। शिक्षा की आड़ में फर्जीवाड़े का खेल खेल रहे एक स्कूल संचालक को एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की टीम ने सलाखों के पीछे पहुंचा दिया है। आरोपी श्री ओम हुड्डा ने एक व्यक्ति को भिवानी बोर्ड के बड़े अधिकारियों से जान-पहचान का झांसा देकर उनके घर की बहू के दस्तावेजों में सुधार कराने के नाम पर 75 हजार रुपये की डील की थी। भ्रष्टाचार के खिलाफ जारी इस मुहिम में एसीबी ने जाल बिछाया और आरोपी को 50 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों काबू कर लिया। पुलिस को जांच के दौरान आरोपी के पास से सरकारी अधिकारियों की जाली मुहरें भी मिली हैं, जो एक बड़े गिरोह की ओर इशारा कर रही हैं।

दस्तावेजों में नाम ठीक कराने का सौदा: 75 हजार में तय हुई थी बात

मामला कैथल के खुराना रोड निवासी रामचंद्र की शिकायत से शुरू हुआ। रामचंद्र अपनी पुत्रवधू के शैक्षणिक दस्तावेजों में उसके माता-पिता का नाम ठीक करवाना चाहते थे। इसी दौरान उनकी मुलाकात गांव चोसाला में स्कूल चलाने वाले श्री ओम हुड्डा से हुई। हुड्डा ने दावा किया कि बोर्ड में उसकी ऊंची पैठ है और वह बिना किसी परेशानी के यह काम करवा देगा, लेकिन इसके बदले उसने 75 हजार रुपये की मांग रखी। बार-बार रुपये के लिए दबाव बनाने पर रामचंद्र ने इसकी सूचना एंटी करप्शन ब्यूरो को दे दी।

रंगे हाथों गिरफ्तारी और जाली स्टैम्प का खुलासा

एसीबी के इंस्पेक्टर सूबे सिंह के नेतृत्व में टीम ने योजनाबद्ध तरीके से रामचंद्र को केमिकल लगे नोट देकर आरोपी के पास भेजा। जैसे ही श्री ओम हुड्डा ने रिश्वत के 50 हजार रुपये पकड़े, टीम ने उसे दबोच लिया। गिरफ्तारी के बाद जब आरोपी के ठिकानों की जांच की गई, तो अधिकारी भी हैरान रह गए। उसके पास से कई उच्चाधिकारियों की फर्जी स्टैम्प बरामद हुईं, जिनका इस्तेमाल वह संभवतः फर्जी दस्तावेज तैयार करने या प्रमाणित करने के लिए करता था।

आदर्श से गीता निकेतन तक का सफर, अब जांच के घेरे में

पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, आरोपी पहले चोसाला गांव में ही 'आदर्श हाई स्कूल' चलाता था और फिलहाल 'गीता निकेतन' के नाम से अपना नया स्कूल संचालित कर रहा है। इंस्पेक्टर सूबे सिंह ने बताया कि पकड़े गए आरोपी से पूछताछ की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि उसने अब तक कितने लोगों को इस तरह के फर्जीवाड़े का शिकार बनाया है। विभाग अब इस बात की भी पड़ताल कर रहा है कि क्या इस खेल में बोर्ड का कोई कर्मचारी या अन्य स्कूल संचालक भी शामिल हैं। फिलहाल आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम और धोखाधड़ी की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है।


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