कैथल में 'मेरी फसल-मेरा ब्योरा' पोर्टल पर बड़ा घोटाला, पंचायती जमीन को फर्जी किसानों के नाम चढ़ाया, हाईकोर्ट सख्त
May 18, 2026 3:56 PM
कैथल। किसानों को उनकी उपज का सही दाम देने और सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता लाने के लिए बनाया गया 'मेरी फसल-मेरा ब्योरा' पोर्टल अब शातिरों के लिए अवैध कमाई का जरिया बनता जा रहा है। कैथल जिले के गांव खरौदी (खरोड़ी) से एक ऐसा ही सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां कुछ रसूखदारों ने फर्जी कागजात और मिलीभगत के दम पर गांव की पूरी पंचायती जमीन को ही पोर्टल पर फर्जी किसानों के नाम रजिस्टर्ड करवा दिया। इस पूरे खेल का मकसद सरकार से मिलने वाली सब्सिडी और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के करोड़ों रुपये को डकारना था। इस कथित महाफर्जीवाड़े पर अब पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं और फटकार लगाई है।
सीएम विंडो भी रही बेअसर, तब थके-हारे ग्रामीण ने खटखटाया अदालत का दरवाजा
इस पूरे घोटाले की परतें तब खुलीं जब गांव के ही जागरूक नागरिक गुरमीत सिंह ने इसके खिलाफ मोर्चा खोला। गुरमीत सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर आरोप लगाया कि जिस सरकारी पोर्टल को किसानों की वास्तविक पहचान सुनिश्चित करने के लिए बनाया गया था, स्थानीय स्तर पर अधिकारियों की ढिलाई के कारण उसका धड़ल्ले से दुरुपयोग किया जा रहा है। याचिकाकर्ता के मुताबिक, उन्होंने इस फर्जीवाड़े को रोकने और दोषियों पर कार्रवाई के लिए मुख्यमंत्री की 'सीएम विंडो' से लेकर जिला प्रशासन के तमाम बड़े अफसरों की चौखट तक के चक्कर काटे। जब प्रशासनिक स्तर पर सिर्फ फाइलों को दबाने और मामले को टालने का काम किया गया, तब जाकर उन्होंने थक-हारकर अदालत की शरण ली।
हाईकोर्ट सख्त, कृषि विभाग के डिप्टी डायरेक्टर को सौंपे जांच के सीधे आदेश
अदालत में मामले की सुनवाई के दौरान जब राज्य सरकार की ओर से इस पूरे प्रकरण को लेकर 21 अप्रैल 2026 की स्टेटस रिपोर्ट पेश की गई, तो उसमें कई खामियां नजर आईं। इसके बाद हाईकोर्ट ने मामले को बेहद गंभीरता से लेते हुए कृषि विभाग के डिप्टी डायरेक्टर को इस पूरे सिंडिकेट की जांच करने की जिम्मेदारी सौंपी है। अदालत ने साफ कहा है कि इस बात की गहराई से जांच की जाए कि आखिर किसकी सह पर और किन दस्तावेजों के आधार पर पंचायती जमीन को निजी और फर्जी लोगों के नाम पर पोर्टल पर चढ़ने दिया गया। इस आदेश के बाद से कैथल के प्रशासनिक गलियारों और कृषि विभाग में हड़कंप मचा हुआ है, क्योंकि जांच की आंच कई छोटे-बड़े सरकारी कर्मचारियों और कंप्यूटर ऑपरेटरों तक पहुंचना तय माना जा रहा है।