कैथल छात्रवृत्ति घोटाला: 91 'कागजी' छात्रों के नाम पर हड़पे 44 लाख, मास्टरमाइंड जेल में
Mar 26, 2026 1:04 PM
कैथल। शिक्षा के नाम पर सरकारी धन हड़पने वाले गिरोह पर हरियाणा एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) का शिकंजा कस गया है। कैथल की एक अदालत में पेश किए गए चालान में एसीबी ने विस्तार से बताया है कि कैसे करोड़ा गांव के एक सेंटर संचालक ने अपने साथियों के साथ मिलकर 44.59 लाख रुपये की छात्रवृत्ति डकार ली। यह पूरा खेल इतनी सफाई से खेला गया कि विभाग को भनक तक नहीं लगी कि जिन 91 छात्रों के नाम पर पैसा निकाला जा रहा है, वे असल में अस्तित्व में ही नहीं थे या उनका उन संस्थानों से कोई लेना-देना नहीं था।
जाली मुहर और फर्जी दस्तखत: ऐसे बुना गया साजिश का जाल
जांच रिपोर्ट के मुताबिक, आरोपियों ने शैक्षणिक सत्र 2013-14 और 2014-15 को अपना निशाना बनाया। उन्होंने पंजाब के विभिन्न शिक्षण संस्थानों के नाम पर फर्जी दाखिला दस्तावेज तैयार किए। साजिश को पुख्ता करने के लिए कॉलेजों की नकली रबर स्टैंप बनवाई गई और प्राचार्यों के जाली हस्ताक्षर किए गए। हद तो तब हो गई जब आरोपियों ने सरकारी दफ्तर में यकीन दिलाने के लिए फर्जी हाजिरी रजिस्टर तक तैयार कर लिए। इन 'कागजी' छात्रों के नाम पर जिला कल्याण अधिकारी कार्यालय से छात्रवृत्ति मंजूर कराई गई और फिर बायोमीट्रिक व चेक के जरिए पूरी राशि निजी खातों में ट्रांसफर कर ली गई।
सलाखों के पीछे मास्टरमाइंड, बैंक अधिकारी की तलाश जारी
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज इस मामले में आरोपी धर्मबीर और राजेश कुमार फिलहाल न्यायिक हिरासत में जेल की हवा खा रहे हैं, जबकि तीसरा आरोपी नवीन कुमार जमानत पर है। हालांकि, इस कहानी का एक अहम सिरा अभी भी बाहर है। एसीबी के रडार पर तत्कालीन बैंक अधिकारी हुकम चंद गुप्ता (रिटायर्ड) हैं, जिनकी गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है। माना जा रहा है कि बिना बैंक अधिकारियों की मिलीभगत के इतने बड़े पैमाने पर फर्जी खाते खोलना और राशि निकालना मुमकिन नहीं था।
भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस
दिसंबर 2023 में दर्ज हुई इस एफआईआर के बाद एसीबी ने कड़ियों को जोड़ते हुए साक्ष्यों का पहाड़ खड़ा कर दिया है। ब्यूरो के अधिकारियों का कहना है कि सरकारी योजनाओं में इस तरह की सेंधमारी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस चालान के पेश होने के बाद अब गेंद अदालत के पाले में है, जहां इन 'सफेदपोश' ठगों को उनके किए की सजा मिलना तय माना जा रहा है।