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राजौंद में सात साल से बदहाल सड़कें बनीं काल, कैथल-असंध मार्ग पर जान जोखिम में डालकर चल रहे राहगीर

Jun 17, 2026 4:52 PM

राजौंद (नरेश कुमार पुहाल)। कहने को तो सड़कें किसी भी क्षेत्र के विकास का आईना होती हैं, लेकिन राजौंद में ये सड़कें पिछले सात सालों से स्थानीय निवासियों के लिए दुःस्वप्न बनी हुई हैं। कस्बे में बुनियादी ढांचे की स्थिति इस कदर गंभीर हो चुकी है कि यहाँ के मुख्य मार्गों से गुजरना जान जोखिम में डालने जैसा है। स्थानीय निवासियों और राहगीरों का गुस्सा इस बात पर उबल रहा है कि राजौंद की सड़कें पहले ही जर्जर थीं, रही-सही कसर नगर में सीवर पाइपलाइन बिछाने के नाम पर पूरी कर दी गई। सीवर के लिए सड़कों को बेरहमी से खोदा तो गया, लेकिन काम खत्म होने के बाद उन्हें उनके हाल पर ही छोड़ दिया गया। नतीजा यह है कि पूरा मार्ग अब जानलेवा गड्ढों और मलबे के ढेर में तब्दील हो चुका है।

वर्तमान में शहर के बीचों-बीच से गुजरने वाले कैथल-असंध मुख्य मार्ग पर निर्माण कार्य तो शुरू किया गया है, लेकिन इसकी रफ्तार इतनी धीमी है कि यह 'कछुआ चाल' शब्द को भी शरमा दे। इस सुस्त कार्यप्रणाली का खामियाजा रोजमर्रा की जिंदगी जीने वाले आम राहगीरों को भुगतना पड़ रहा है। उबड़-खाबड़ रास्ते और सड़क पर हर तरफ बिखरे नुकीले पत्थरों के कारण दोपहिया वाहन चालक रोजाना फिसलकर चोटिल हो रहे हैं। राहगीर सुबह घर से निकलते वक्त इस बात को लेकर आशंकित रहते हैं कि वे सुरक्षित वापस लौट पाएंगे या नहीं।

उड़ते पत्थर और ठप कारोबार: दुकानदारों का दर्द आया सामने

इस प्रशासनिक उदासीनता की सबसे भारी कीमत सड़क किनारे बैठे छोटे व्यापारियों और दुकानदारों को चुकानी पड़ रही है। स्थानीय दुकानदारों ने अपना दर्द बयां करते हुए बताया कि धूल के गुबार और बदहाली के कारण ग्राहकों ने बाजारों का रुख करना बंद कर दिया है, जिससे उनका धंधा मंदा हो गया है।

मुसीबत यहीं खत्म नहीं होती; जब कोई तेज रफ्तार बड़ा वाहन या डंपर इन उखड़ी सड़कों से गुजरता है, तो उसके भारी पहियों के नीचे दबकर पत्थर बंदूक की गोली की रफ्तार से उछलते हैं। ये उड़ते हुए पत्थर सीधे दुकानों के भीतर बैठे लोगों और ग्राहकों को लग रहे हैं, जिससे कई लोग गंभीर रूप से घायल हो चुके हैं।

डीसी की सख्ती भी बेअसर, दावों और हकीकत में जमीन-आसमान का अंतर

हैरानी की बात यह है कि इस गंभीर समस्या को लेकर पिछले दिनों इलाके के मौजिज लोग कैथल के उपायुक्त (डीसी) से भी मिले थे। ग्रामीणों ने डीसी को राजौंद की सड़कों की इस नारकीय स्थिति से रूबरू कराया था, जिस पर संज्ञान लेते हुए डीसी ने संबंधित विभाग को जल्द से जल्द निर्माण कार्य पूरा करने के सख्त आदेश दिए थे। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि आला अफसर के आदेशों के बाद भी प्रशासनिक अमले की सेहत पर कोई असर नहीं पड़ा है और हालात आज भी जस के तस बने हुए हैं।

जब इस पूरे मामले पर लोक निर्माण विभाग (PWD) के जूनियर इंजीनियर (जेई) से बात की गई, तो उन्होंने एक नया तकनीकी पेंच सामने रख दिया। जेई का कहना है कि राजौंद की इस सड़क पर इंटरलॉकिंग ब्लॉक लगाए जाने थे, लेकिन डिजाइन और काम के तरीके को लेकर कुछ स्थानीय लोगों ने आपत्ति और नाराजगी जाहिर की थी। इस विवाद की पूरी रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेज दी गई है। जेई ने दावा किया कि जैसे ही मुख्यालय से नए दिशा-निर्देश या अंतिम आदेश प्राप्त होंगे, सड़क निर्माण का काम नए सिरे से शुरू करवा दिया जाएगा। अब देखना यह है कि अफसरों की इस कागजी लिखापढ़ी के बीच राजौंद की जनता को इस जानलेवा सफर से कब तक मुक्ति मिल पाती है।

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