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कुरुक्षेत्र में गैस के लिए 'गदर': महावीर एजेंसी के बाहर भारी हंगामा, पुलिस ने संभाला मोर्चा

Mar 27, 2026 2:51 PM

कुरुक्षेत्र। धर्मनगरी कुरुक्षेत्र में इन दिनों रसोई गैस (LPG) को लेकर हाहाकार मचा हुआ है। शुक्रवार सुबह शहर की प्रसिद्ध महावीर गैस एजेंसी के बाहर का नजारा किसी युद्ध स्तर की तैयारी जैसा था। सैकड़ों की तादाद में महिलाएं और बुजुर्ग खाली सिलेंडर लेकर सड़कों पर उतर आए। जैसे-जैसे सूरज चढ़ता गया, उपभोक्ताओं का गुस्सा भी सातवें आसमान पर पहुंच गया। स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि ट्रैफिक जाम होने लगा और अंततः स्थानीय पुलिस को हस्तक्षेप कर भीड़ को नियंत्रित करना पड़ा।

"मैसेज आ गया पर सिलेंडर नहीं": डिजिटल इंडिया के दावों पर सवाल

लाइन में खड़े रामकुमार सिंगला की आपबीती सुनकर सिस्टम की खामियां उजागर होती हैं। उन्होंने बताया, "मैंने 13 मार्च को ऑनलाइन बुकिंग की थी। 18 मार्च को मेरे फोन पर मैसेज आ गया कि सिलेंडर डिलीवर हो गया है, लेकिन हकीकत में मेरे घर आज तक कोई नहीं पहुंचा।" यही कहानी लगभग हर दूसरे उपभोक्ता की है। लोगों का आरोप है कि एजेंसी कागजों में कोटा पूरा दिखा रही है, जबकि असल में सिलेंडर उन रसूखदारों या कालाबाजारियों तक पहुंच रहे हैं जो मोटी रकम देने को तैयार हैं।

महिलाओं का फूटा गुस्सा: "15 दिन से चूल्हा जलने का इंतजार"

एजेंसी के रवैये से सबसे ज्यादा परेशान गृहणियां दिखीं। उपभोक्ता हरप्रीत कौर ने तीखे लहजे में कहा, "15 दिन पहले पैसे जमा किए थे, लेकिन एजेंसी का कोई कर्मचारी फोन तक नहीं उठाता। जब यहां आते हैं तो हर रोज 'कल आना' कहकर टाल दिया जाता है। अगर ये घर पर डिलीवरी नहीं दे सकते, तो हमें गोदाम से खुद सिलेंडर ले जाने की इजाजत दें, हम कतारों में धक्के खाने को मजबूर नहीं हैं।" वहीं किरण नामक महिला ने बताया कि वह एक सप्ताह से लगातार चक्कर काट रही हैं, लेकिन हर बार निराशा ही हाथ लगती है।

एजेंसी की चुप्पी और कालाबाजारी के आरोप

जब मौके पर मौजूद मीडिया कर्मियों ने महावीर गैस एजेंसी के प्रबंधन से इस किल्लत और वितरण में हो रही धांधली पर सवाल किए, तो अधिकारियों ने कैमरे के सामने आने से साफ इनकार कर दिया। कर्मचारियों की इस चुप्पी ने उपभोक्ताओं के उस शक को और पुख्ता कर दिया है जिसमें कहा जा रहा है कि सिलेंडरों की बीच रास्ते में ही बंदरबांट की जा रही है। उपभोक्ताओं ने जिला प्रशासन और खाद्य एवं आपूर्ति विभाग से मांग की है कि इस एजेंसी के स्टॉक रजिस्टर और डिलीवरी लॉग की गहन जांच की जाए ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।

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